अनंत चतुर्दशी पर इंदौर में निकला भव्य झांकी चल समारोह, 25 झांकियों और 65 अखाड़ों ने बांधा समां
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अनंत चतुर्दशी पर इंदौर एक बार फिर अपनी करीब एक शताब्दी पुरानी गौरवशाली झांकी परंपरा का गवाह बना। शाम 7 बजे शुरू हुए झांकी चल समारोह में शहर की सड़कों पर रंग-बिरंगी और झिलमिलाती झांकियों का कारवां नजर आया। सबसे आगे खजराना गणेश मंदिर की तीन झांकियां रहीं। इसके बाद इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, होप टेक्सटाइल, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल, राजकुमार मिल और अन्य संस्थानों की झांकियां शामिल हुईं।
इस बार चल समारोह में कुल 25 झांकियां और 65 अखाड़ों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। अखाड़ों के कलाकारों ने तलवारबाजी और अन्य हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। झांकियों में महिला सशक्तिकरण, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा, चंद्रमा और रोहिणी का विवाह, भोलेनाथ की बारात, मां दुर्गा और शुंभ-निशुंभ का युद्ध, नशामुक्ति का संदेश, बाली-सुग्रीव युद्ध और भगवान विष्णु का मधु-कैटभ से युद्ध सहित कई धार्मिक और सामाजिक विषयों को प्रदर्शित किया गया।
खजराना गणेश मंदिर की झांकी में अशोक वाटिका में माता सीता और हनुमान के संवाद सहित धार्मिक प्रसंगों को भी आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया। चल समारोह जेल रोड, महात्मा गांधी मार्ग, कृष्णपुरा, जवाहर मार्ग, नृसिंह बाजार और खजूरी बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। झांकियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित सड़कों पर मौजूद रहे और देर रात तक इस भव्य आयोजन का आनंद लिया।
चल समारोह के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। इंदौर की इस प्रसिद्ध झांकी परंपरा ने एक बार फिर शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की झलक पेश की।
बाइट-01: कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री, मध्य प्रदेश
बाइट-02: आर.के. त्रिपाठी, डीसीपी क्राइम, इंदौर
बाइट-03: प्रत्यूष पांचाल, दर्शक बाइट-04: अशोक भट्ट, पुजारी, खजराना गणेश मंदिर
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
इंदौर की झांकी परंपरा हमें याद दिलाती है कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजना समाज की एकजुटता का प्रतीक है। जब भी किसी विवाद का सामना हो, शांत संवाद और कानूनी मार्ग अपनाएँ, ताकि हिंसा से बचा जा सके। हम सबको मिलकर परंपराओं को आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस गौरव को समझें और उसका सम्मान करें।