अंडा, चिकन और दूध क्यों हो रहे महंगे, जेब पर भारी दामों की असली वजह क्या?
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
भारत में महंगाई पिछले कुछ समय से काफी तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में दूध, अंडे और चिकन के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. खास बात ये है कि इनके उत्पादन की लागत भी तेजी से बढ़ रही है.
लेकिन आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? ये एक बड़ा सवाल है जो कई लोगों के मन में भी आ रहा है. आइये जानते हैं इसकी सबसे बड़ी वजह आखिर क्या है?
दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह पशुओं और मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले मक्का और सोयाबीन की महंगी कीमतें हैं.
अगर आने वाले कुछ महीनों में मक्का और चारे की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
तेजी से बढ़ा पशुधन क्षेत्र का महत्व
भारत के पशुधन क्षेत्र का महत्व पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है.
साल 2013-14 में पशुधन से जुड़े कामों से आने वाली कीमतें फसल क्षेत्र की कीमतों से भी करीब 34% ज्यादा थी. साल 2023-24 में ये बढ़कर 57% हो गया है.
इसका मतलब है कि दूध, अंडे, मांस और दूसरे पशु उत्पाद अब भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं.
ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission पर बड़ी मांग, 3.83 फिटमेंट फैक्टर मिला तो सैलरी होगी 69 हजार के पार
चारे की कीमत है चुनौती मुर्गियों और दूसरे पशुओं के चारे में मक्का सबसे जरूरी भूमिका निभाता है.
ब्रॉयलर मुर्गियों के चारे में करीब 55-65% मक्का होता है, जबकि अंडे देने वाली लेयर मुर्गियों के चारे में करीब 50-60% मक्का होता है. पशुओं के चारे में भी मक्के की हिस्सेदारी करीब 15-20% रहती है.
तो वहीं दूसरी तरफ, प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए सोयाबीन मील, सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी और कपास के बीज से निकलने वाली खली का इस्तेमाल किया जाता है.
ब्रॉयलर फीड में करीब 25-30% सोयाबीन मील और लेयर फीड में करीब 18-20% सोयाबीन मील होता है. ऐसे में इन कच
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भारत में अंडा, चिकन और दूध की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है, जिसका कारण चारे की लागत में बढ़ोतरी और उत्पादन खर्चों का बढ़ना है। यह विषय महंगाई के बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जो खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता खर्च पर असर डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सामान्य परिवारों के बजट पर सीधा प्रभाव डालती है, खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग पर। यदि कीमतें लगातार बढ़ती रही तो खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है, जिससे सामाजिक तनाव और आर्थिक असमानता में इजाफा हो सकता है।