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अंधेरे से उजाले तक का सफर: जहां महिलाएं रास्ता बदल लेती थीं, आज वहां गूंज रही क्रिकेट

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अंधेरे से उजाले तक का सफर: जहां महिलाएं रास्ता बदल लेती थीं, आज वहां गूंज रही क्रिकेट

अंधेरे से उजाले तक का सफर: जहां महिलाएं रास्ता बदल लेती थीं, आज वहां गूंज रही क्रिकेट मेरठ ।कभी अपने एक अलग और बदनाम अतीत के लिए पहचाना जाने वाला मेरठ का 62, कबाड़ी बाजार क्षेत्र अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जिस जगह पर कभी लोग जाने से कतराते थे, वहां अब युवाओं के बल्ले की ठक-ठक, गेंद की रफ्तार और चौके-छक्कों की आवाज सुनाई दे रही है।

रविवार को यहां शिमजा क्रिकजोन टर्फ का भव्य शुभारंभ हुआ। यह महज एक क्रिकेट टर्फ का उद्घाटन नहीं, बल्कि एक ऐसे क्षेत्र को नई और सकारात्मक पहचान देने की पहल है। इस बदलाव के पीछे युवा उद्यमी जुनैद जमील अहमद हैं। उन्होंने उस स्थान पर निवेश करने का निर्णय लिया, जहां आमतौर पर लोग निवेश करने से बचते रहे हैं।

उनका उद्देश्य खेल को युवाओं तक पहुंचाने के साथ इस क्षेत्र की पहचान को बदलना है। टर्फ का कॉन्सेप्ट ‘PLAY | WATCH | CONNECT’ रखा गया है। यहां ग्रीन टर्फ पर प्रोफेशनल क्रिकेट प्रैक्टिस, नेट प्रैक्टिस, बॉक्स क्रिकेट और नाइट क्रिकेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। युवाओं को मिली नई उड़ान उद्घाटन समारोह में शहर के गणमान्य लोगों, खेल प्रेमियों और बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया।

स्थानीय युवाओं ने बताया कि अब तक उन्हें क्रिकेट अभ्यास के लिए शहर के दूसरे हिस्सों में जाना पड़ता था। शहर के बीचों-बीच आधुनिक क्रिकेट सुविधा मिलने से उनका समय और आने-जाने का खर्च बचने के साथ प्रतिभा को निखारने का अवसर भी मिलेगा। समारोह के दौरान अतिथियों ने स्वयं बल्ला थामकर टर्फ पर क्रिकेट का अनुभव लिया।

उन्होंने इस पहल को मेरठ में हो रहे सामाजिक बदलाव की एक तस्वीर बताया। उनका कहना था कि किसी स्थान की पहचान केवल उसके अतीत से तय नहीं होती, बल्कि सकारात्मक प्रयास उसे नई पहचान दे सकते हैं। कभी महिलाएं और छात्राएं बदल लेती थीं रास्ता जुनैद जमील अहमद बताते हैं कि एक समय इस इलाके की स्थिति ऐसी थी कि लोग दिन में भी यहां आने-जाने से बचते थे।

शाम होते ही बाजार का माहौल बदल जाता था और दुकानदार भी जल्दी शटर गिराने लगते थे। महिलाओं और स्कूली छात्राओं के लिए यह रास्ता असहज माना जाता था। कई लोग इस मार्ग से गुजरने के बजाय लंबा रास्ता तय करना पसंद करते थे। इसी वजह से कबाड़ी बाजार की पहचान लंबे समय तक नकारात्मक चर्चाओं से जुड़ी रही।

अब उसी स्थान पर क्रिकेट की गतिविधियां शुरू होना इस बदलाव को और खास बना रहा है। ‘ बदनाम गली’ से ‘खेल की गली’ बनाने का सपना जुनैद जमील अहमद कहते हैं, “हम इस जगह को बदनाम गली से खेल की गली बनाना चाहते हैं। हमारी कोशिश है कि लोग कहें—चलो कबाड़ी बाजार, क्रिकेट खेलने।” उनके मुताबिक, यह पहल केवल खेल की सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है।

इसके जरिए क्षेत्र में युवाओं की आवाजाही बढ़ेगी, परिवारों का आना-जाना होगा और लोगों की धारणा में भी बदलाव आएगा। रेड लाइट से स्पोर्ट्स लाइट तक शिमजा क्रिकजोन टर्फ की शुरुआत इस क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। जिस जगह की पहचान कभी नकारात्मक चर्चाओं से होती थी, वहां अब खेल और युवाओं की ऊर्जा दिखाई दे रही है।

यह बदलाव एक संदेश भी देता है—किसी जगह की पहचान स्थायी नहीं होती। सकारात्मक सोच, साहस और सही पहल से बदनाम मानी जाने वाली जगह भी नई पहचान हासिल कर सकती है। कबाड़ी बाजार में क्रिकेट की गूंज इसी बदलती तस्वीर का संकेत है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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