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Anne Carson ने जीता साहित्य का नोबेल, प्राचीन को आधुनिकता से जोड़ने में माहिर

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Anne Carson ने जीता साहित्य का नोबेल, प्राचीन को आधुनिकता से जोड़ने में माहिर

2026 के लिए साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान गुरुवार को किया गया.

नोबल पुरस्कार देने वाली स्वीडिश अकादमी ने इस साल ये सम्मान कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन(Anne Carson) को दिया है.

स्वीडिश अकादमी के अनुसार, उन्हें यह पुरस्कार उनके "बेबाक और नए प्रयोगों" के लिए मिला है.

उन्होंने क्लासिकल परंपरा के साथ नए प्रयोग कर समकालीन साहित्य के लिए नए रूप गढ़े हैं.

अपने पूरे करियर के दौरान, ऐन कार्सन ने कविता लिखने के साथ-साथ अनुवाद का काम और अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का काम भी किया है.

शब्दों की व्युत्पत्ति ही सभी कामों की शुरुआत उनका लगभग सारा साहित्यिक काम शब्दों के प्रति एक भाषा-विशेषज्ञ के जुनून और नए अर्थों की तलाश करने वाले कवि के नजरिए के मेल पर केंद्रित रहा है.

उन्होंने खुद माना है कि शब्दों की व्युत्पत्ति ही उनके सभी कामों की शुरुआती कड़ी रही है. 'इरोस द बिटरस्वीट' है सबसे विख्यात रचना कार्सन का जन्म 1950 में टोरंटो में हुआ था .

उन्होंने 1981 में क्लासिक्स विषय में ‘ओडी एट अमो एर्गो सम’ नाम से डॉक्टरेट थीसिस प्रकाशित कर पीएचडी की डिग्री प्राप्त की.

नोबेल प्राइज के ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी जानकारी के मुताबिक, 1986 में प्रकाशित ‘इरोस द बिटरस्वीट’ को इनका सबसे बेहतरीन लेखन माना जाता है.

इसमें उन्होंने प्राचीन ग्रीक साहित्य के जरिए प्रेम और इच्छा के मर्म को समझाया है . उनके मुताबिक, प्रेम में हर्ष और कष्ट दोनों शामिल हो सकते हैं.

प्राचीन को आधुनिकता से जोड़ने में माहिर कार्सन की खासियत अलग-अलग दौर के लेखकों को एक ही रचना में साथ मिलाकर रखना है. 1999 की ‘इकोनॉमी ऑफ द अनलॉस्ट’ में उन्होंने प्राचीन यूनानी कवि सिमोनाइड्स को आधुनिक कवि पॉल सेलान के साथ मिलाकर रखा.

सन 2000 की ‘मेन इन द ऑफ आवर्स’ में उन्होंने प्राचीन इतिहासकार थ्यूसीडिडीज और आधुनिक लेखिका वर्जीनिया वूल्फ को जोड़ा. इस तरह उन्होंने पुराने और नए साहित्य के बीच नया पुल बनाने की कोशिश की.

नोबेल पुरस्कार विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में पुरस्कृत किया जाएगा. उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी.

पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर(Swedish krona) यानी करीब 11.5 करोड़ भारतीय रुपए है.

इस पुरस्कार की एक खास की बात यह है कि स्वीडिश अकादमी नोबेल के लिए नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट कभी जारी नहीं करती.

नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक छुपा कर रखी जाती है. 2026 में किन लेखकों को नॉमिनेट किया गया है, इसकी पूरी जानकारी साल 2076 में जाहिर की जाएगी.

📡 स्रोत: NewsData.io

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