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अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रतिस्पर्धी पब्लिक-प्राइवेट पारिस्थितिकी तंत्र में बदला

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रतिस्पर्धी पब्लिक-प्राइवेट पारिस्थितिकी तंत्र में बदला

वर्ष 2020 में शुरू किए गए तथा भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 पर आधारित भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को सरकारी एकाधिकार से बदलकर एक जीवंत और प्रतिस्पर्धी पब्लिक-प्राइवेट पारिस्थितिकी तंत्र में बदल दिया है।

भारतीय तकनीकी संस्‍थान मद्रास के इंजीनियरों की टीम द्वारा शुरू किया गया अंतरिक्ष स्टार्टअप गैलेक्सआई (GalaxEye) इसका एक बड़ा उदाहरण है। इस स्टार्टअप ने दुनिया का पहला ऑप्टो-SAR (optoSAR) सैटेलाइट मिशन दृष्टि (Mission Drishti) विकसित किया है। गैलेक्सआई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्‍थापक सुयश सिंह ने आकाशवाणी से खास बातचीत में अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों के फायदों के बारे में बताया है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब सार्वजनिक-निजी सहयोग से समृद्ध हुआ है, जो नवाचार और समावेशिता का प्रतीक है। इसी तरह, समाज में भी संघर्षों का समाधान संवाद और सहयोग से करना चाहिए। जब विवाद उत्पन्न हों, तो कानूनी मार्ग और सामूहिक प्रयास से समाधान खोजें, न कि हिंसा से। हर व्यक्ति की गरिमा और योगदान को मानते हुए, हम एक सशक्त, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज बना सकते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।