अपने गांव के फ्रेम | रीमा दास, 45 वर्ष | फिल्मकार, कलार्दिया गांव, असम

क्या है जो उन्हें बनाता है सिरमौर : उनकी छोटे पैमाने वाली फिल्मों ने टोरंटो से बर्लिन और भारत तक फिल्म फेस्टिवलों में वाहवाही लूटी. पिछले साल की एक और उपलब्धि थी फिल्म नॉट ए हीरो, जो गांव के जीवन में ढलते शहरी लड़के की कहानी है
📡 स्रोत: NewsData.io