राजनीति

‘अपनी गणना-अपने गांव’ अभियान के ज़रिए प्रवासी उत्तराखंडियों से अपील

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘अपनी गणना-अपने गांव’ अभियान के ज़रिए प्रवासी उत्तराखंडियों से अपील

17 अक्तूबर 2026, देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना की तैयारियों के बीच ‘अपनी गणना-अपने गांव’ अभियान ने जोर पकड़ लिया है। अभियान का उद्देश्य शहरों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों को अपने पैतृक गांव में जनगणना कराने के लिए प्रेरित करना है। इससे न केवल गांवों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आएगा, बल्कि पहाड़ों की राजनीतिक भागीदारी और विकास की जरूरतों को भी मजबूती मिलेगी।

इस अभियान के संयोजक और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा परिषद के उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट प्रवासियों को अपने मूल गांव से जुड़ने की अपील कर रहे हैं। जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के सही और वास्तविक आंकड़े सरकार तक पहुंचें, जिससे वहां की ज़रूरतों के अनुसार बेहतर नीतियां और कल्याणकारी योजनाएं बनाई जा सकें। उन्होंने कहा कि जनगणना में गांव की वास्तविक आबादी दर्ज होना जरूरी है, ताकि भविष्य की योजनाएं और संसाधनों का आवंटन सही आंकड़ों के आधार पर हो सके।

अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि जनगणना के आंकड़े भविष्य के परिसीमन में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर हुए परिसीमन में उत्तराखंड के नौ पर्वतीय जिलों में विधानसभा सीटें 40 से घटकर 34 रह गई थीं, जबकि चार मैदानी जिलों में सीटों की संख्या 36 हुई। ऐसे में पहाड़ों की आबादी और प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता स्वाभाविक है। बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला भी इस अभियान को गांवों के हित में महत्वपूर्ण मानते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।