Apple Pay vs UPI: क्या गूगल पे और PhonePe को मिलेगी टक्कर?
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आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल की भारत में Apple Pay सर्विस जल्द शुरू होने वाली है. माना जा रहा है कि अक्टूबर की शुरुआत में एप्पल पे भारत में लॉन्च हो सकता है.
जानिए आईफोन यूजर्स को इस बारे में क्या-क्या जानने की जरूरत है, जिसमें एक्सिस बैंक, UPI,क्यूआर पेमेंट और फोनपे के साथ GPay के विषय शामिल हैं.
Apple Pay बनाम GPay और PhonePe
12 सालों के लंबे इंतजार के बाद भारत ये में एप्पल पे की सर्विस आखिरकार आने वाली है.
जान लें कि अमेरिका (USA) में ये सर्विस 2014 में लॉन्च हो गई थी, लेकिन भारत में इसे लाने में कंपनी को 12 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा.
अब जब ये सर्विस भारत में आने की दस्तक दे रही है तो ऐसा माना जा सकता है कि दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में से एक भारत के लिए एप्पल बड़ी तैयारी कर रही है.
ये एप्पल के बड़े कारोबारी साम्राज्य में एक और मील का पत्थर हो सकता है.
बड़ा सवाल ये नहीं है कि एप्पल पे भारत में कब आ रहा है, बल्कि बड़ा सवाल ये है कि जब ये भारत में आ जाएगा तो उसके बाद क्या होगा?
बाजार में चल रही रिपोर्ट्स को मानें तो शुरुआत में एप्पल क्रेडिट कार्ड फोकस्ड रोलआउट चालू करेगा.
हालांकि अन्य रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि कार्ड के अलावा ये यूपीआई को भी सपोर्ट करने वाली सर्विस हो सकती है.
शायद इसी वजह से एप्पल पे की सर्विस का ये लॉन्च ऐसे बड़े सवालों को ला रहा है, जो अहम हैं.
एप्पल ने भारत में एंट्री के लिए किया एक्सिस बैंक का चुनाव
एप्पल ने भारत में अपनी यात्रा शुरू करने के लिए एक्सिस बैंक का चुनाव किया है.
एप्पल अन्य बैंकों से हाथ मिलाने से पहले एक्सिस बैंक के साथ इसकी शुरुआत कर रहा है.
इसके जरिए कंपनी को भारत में 1.63 करोड़ एक्टिव एक्सिस क्रेडिट कार्ड (जुलाई 2026 तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक) को एक्सेस करने का मौका मिलेगा.
ये साझेदारी एप्पल को पोटेंशियल यूजर्स (संभावित ग्राहकों) तक पहुंचने में खासी मदद करेगी.
QR से जुड़ी दिक्कतें या परेशान
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
Apple Pay की भारत में शुरुआत, जो अक्टूबर के शुरुआती महीनों में हो सकती है, एक नया डिजिटल भुगतान विकल्प लेकर आई है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय उपभोक्ताओं को एक वैश्विक ब्रांड से सीधे मोबाइल पेमेंट का विकल्प देती है, जिससे UPI, PhonePe और GPay के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इसके परिणामस्वरूप, उपयोगकर्ताओं को अधिक विकल्प, बेहतर सुरक्षा और संभवतः कम लेनदेन शुल्क मिल सकते हैं, जिससे डिजिटल भुगतान का प्रसार और सुविधा में वृद्धि की उम्मीद है।