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Army Success Story: अच्छी थी कॉर्पोरेट नौकरी, लेकिन मंजिल सेना, NIT कालीकट के Civil Engineer ने लिया ये बड़ा फैसला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 10 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Army Success Story: अच्छी थी कॉर्पोरेट नौकरी, लेकिन मंजिल सेना, NIT कालीकट के Civil Engineer ने लिया ये बड़ा फैसला

Indian Army Success Story: किसी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट के लिए प्रतिष्ठित NIT से पढ़ाई करने के बाद दुनिया की बड़ी एनर्जी कंपनियों में नौकरी हासिल करना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.

लेकिन अथिरा सुरेश ने करियर की इस सुरक्षित राह से आगे बढ़कर एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी कहानी को खास बना दिया.

NIT कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद अथिरा ने ExxonMobil की नौकरी छोड़कर इंडियन आर्मी में शामिल होने का फैसला किया.

उनके इस सपने को 5 सितंबर 2026 को नई पहचान मिली, जब गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) की पासिंग आउट परेड में उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन किया गया.

IIT-JEE से NIT कालीकट तक पहुंची अथिरा केरल के कोझिकोड की रहने वाली अथिरा ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए IIT-JEE परीक्षा पास की और इसके बाद NIT कालीकट में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया.

तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रखा और ExxonMobil में प्रोजेक्ट कंट्रोल्स इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया.

एक प्रतिष्ठित संस्थान की डिग्री और ग्लोबल एनर्जी कंपनी में नौकरी उनके करियर को मजबूत दिशा दे रही थी. मगर अथिरा के मन में सेना में जाने की इच्छा लगातार बनी रही.

पहली कोशिश में SSB पास कर पूरा किया सपना सेना में करियर बनाने के लिए अथिरा ने सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (SSB) की परीक्षा दी. खास बात यह रही कि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में SSB पास कर लिया.

इसके बाद उन्हें शॉर्ट सर्विस कमीशन टेक्निकल वुमन कोर्स के तहत ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, गया में प्रशिक्षण के लिए चुना गया.

इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट अनुभव के बाद सैन्य प्रशिक्षण का यह सफर उनके लिए बिल्कुल नई चुनौती था.

पिता की सैन्य सेवा बनी प्रेरणा अथिरा के सेना में जाने के फैसले के पीछे उनके परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. उनके पिता नायक सुरेश कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में सेवा दे चुके हैं.

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में भी काम किया. अथिरा ने अपने पिता की सैन्य पृष्ठभूमि से प्रेरणा मिलने की बात कही है. उनकी मां सुमा शिक्षिका हैं.

यही पारिवारिक माहौल शायद उनके भीतर देशसेवा की भावना को मजबूत करता रहा.

OTA गया में मिली नई पहचान 5 सितंबर को OTA गया की 29वीं पासिंग आउट परेड अथिरा के लिए लंबे सफर का अहम पड़ाव बनी.

इस समारोह में कुल 253 ऑफिसर कैडेट्स, जिनमें 35 महिलाएं शामिल थीं, ने प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया.

अथिरा ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा से लेकर NIT की पढ़ाई, ग्लोबल कंपनी में नौकरी और फिर सैन्य प्रशिक्षण तक कई अलग-अलग पड़ाव पार किए.

लेकिन उनकी कहानी की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने सफलता की पारंपरिक परिभाषा से संतुष्ट होने के बजाय अपने जुनून और देशसेवा के सपने को प्राथमिकता दी.

📡 स्रोत: NewsData.io

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