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असम में अफसर ने CM-मंत्रियों की आवाज से करोड़ों ठगे:जिला विकास अधिकारी के पद पर है; सरकार ठेका और नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली करता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
असम में अफसर ने CM-मंत्रियों की आवाज से करोड़ों ठगे:जिला विकास अधिकारी के पद पर है; सरकार ठेका और नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली करता

असम में राज्य सिविल सर्विस के अफसर देवेश्वर बोरा पर करोड़ों रुपए की ठगी के आरोप लगे हैं। बोरा धेमाजी जिला विकास अधिकारी (DDO) के पद पर हैं। आरोप है कि उन्होंने सरकारी ठेका, नौकरी और शराब की दुकान का लाइसेंस दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे लिए। शिकायतों के मुताबिक, बोरा ने एक व्यक्ति से ₹2 करोड़ और दूसरे से ₹50 लाख लिए।

उन पर राजनीतिक नेता रमेन बरठाकुर से भी ₹50 लाख रिश्वत मांगने का आरोप है। इसके अलावा सरकारी बंगले की मरम्मत कराने के बाद ठेकेदार को भुगतान नहीं करने की शिकायत भी सामने आई है। विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि ठगी का सिलसिला साल 2011 से चल रहा था। जांच के दौरान बड़े नेताओं और मंत्रियों की आवाज की नकल कर लोगों को फोन करवाने की बात भी सामने आई है।

मामले में पीड़ितों की संख्या बढ़ने का अनुमान है। बड़े नेताओं की आवाज में फोन कर जीतता था भरोसा SSP रोजी कलिता के मुताबिक, देवेश्वर बोरा लोगों को अपनी ऊंची पहुंच का भरोसा दिलाता था। जांच में पीड़ितों ने बताया कि बोरा उन्हें बड़े नेताओं और मंत्रियों से फोन पर बात करवाता था। आरोप है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, मुख्य सचिव और दूसरे बड़े नेताओं-मंत्रियों की आवाज की नकल की जाती थी।

इससे लोगों को लगता था कि बोरा की सत्ता के बड़े लोगों तक सीधी पहुंच है और वह उनका काम करवा सकता है। इसी भरोसे पर वे उसे लाखों-करोड़ों रुपए दे देते थे। कलिता के मुताबिक, बोरा एक व्यक्ति से पैसे लेकर दूसरे व्यक्ति को देता था और इसी रकम से अपना नेटवर्क चलाता था। बोरा अकेला नहीं था, पूरी टीम शामिल थी जांच में सामने आया है कि बोरा के साथ एक पूरी टीम काम करती थी।

टीम के सदस्य लोगों से संपर्क करने और ठगी को अंजाम देने में मदद करते थे। अब जांच एजेंसी इस टीम में शामिल लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है। कई शिकायतों के बाद दर्ज हुआ केस कई पीड़ित CM विजिलेंस के पास पहुंचे। अलग-अलग शिकायतों और प्राथमिकी को जोड़कर देवेश्वर बोरा के खिलाफ मामला संख्या 14/26 दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच में धोखाधड़ी के मामले साल 2011 से जुड़े पाए गए हैं। इसी वजह से केस में पुराने भारतीय दंड संहिता की धाराओं का भी इस्तेमाल किया गया है। अब एजेंसी ठगी की कुल रकम और प्रभावित लोगों की संख्या का पता लगा रही है। 9 मोब

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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असमानता और भ्रष्टाचार से बचने के लिए हमें पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। जब किसी अधिकारी पर अवैध लाभ का आरोप हो, तो कानूनी मार्ग अपनाना सबसे सही कदम है—साक्ष्य जुटाकर अदालत में शिकायत दर्ज करें। समाज को जागरूक करना, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना और साक्षरता बढ़ाना हमें एक सशक्त, न्यायसंगत भविष्य की ओर ले जाएगा।

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