Asian Games 2026: दूसरे गोल्ड से चूका भारत, बैडमिंटन टीम की सेमीफाइनल में हार; मिला ब्रॉन्ज
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एशियन गेम्स में भारत दूसरे गोल्ड मेडल से चूक गया.
बुधवार (23 सितंबर) को पुरुष बैडमिंटन टीम चीन के खिलाफ सेमीफाइन मुकाबला 1-3 से हार गई.
इस हार के साथ टीम इंडिया को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा और टीम का इवेंट में सफर भी समाप्त हो गया. यह भारतीय दल के लिए 12वां मेडल रहा.
इवेंट में भारत का पिछला मेडल 2023 में आया था, जब सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने पुरुष डबल्स में गोल्ड अपने नाम किया था.
क्वार्टर फाइनल में जापान को दी थी शिकस्त
टीम इंडिया ने क्वार्टर फाइनल में जापान को 3-0 से हराकर सेमीफाइनल में कदम रखा था. उससे पहले राउंड-5 में भारतीय टीम ने बांग्लादेश को 3-0 से हराया था.
लेकिन टीम का यह जलवा सेमीफाइनल में बरकरार नहीं रह सका.
ऐसा रहा सेमीफाइनल मुकाबले का हाल
मौजूदा चैंपियन चीन के खिलाफ भारतीय टीम को मजबूत सिंगल्स लाइन-अप और बेहतरीन डबल्स कॉम्बिनेशन का सामना करना पड़ा. सेमीफाइनल की शुरुआत लक्ष्य सेन ने की. उनका सामना शी युकी से हुआ.
लक्ष्य ने मुकाबले में काफी संघर्ष किया और मैच को करीब भी लाए, लेकिन अंतत: उन्हें 16-21, 18-21 से हार का सामना करना पड़ा.
इसके बाद सात्विक और चिराग ने टीम इंडिया की कमान संभाली.
दोनों ने डबल्स के दूसरे मैच में चीन के लियांग वेइकेन्ग और वांग चांग को 21-11, 22-20 से हराया. अब मैच बराबरी पर आ गया था. यहां से लगा कि भारत के लिए फाइनल की राह आसान हो गई.
लेकिन आखिरी 2 गेम में चीन की तरफ से दमदार पलटवार देखने को मिला.
तीसरे मैच में आयुष शेट्टी का सामना ली शिफेंग से हुआ. चीनी खिलाड़ी ने मैच में आयुष को 21-19, 21-13 से हराया.
इसके बाद चौथे और निर्णायक गेम में भारत की तरफ से एम आर अर्जुन और हरिहरन अमसाकरुणन मैदान पर उतरे. दोनों ने जी टिंग और लियू यी से सामना किया.
मैच में चीनी जोड़ी ने 21-16, 17-21, 21-9 से जीत हासिल करके सेमीफाइनल अपने नाम कर लिया.
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📡 स्रोत: ABP Live Khel
💡 पृष्ठभूमि (Background)
एशियन गेम्स 2026 में पुरुष बैडमिंटन टीम की सेमीफाइनल में चीन को 1-3 से हारने के बाद भारत ने दूसरा स्वर्ण मेडल चूक दिया और केवल ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त किया। यह घटना भारतीय खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि 2023 में ही टीम ने पुरुष डबल्स में स्वर्ण जीता था, जिससे उम्मीदें बढ़ गई थीं। इस हार से राष्ट्रीय स्तर पर खेल के प्रति समर्पण और प्रशिक्षण पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस हुई। आम जनता में निराशा के साथ-साथ भविष्य के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी मिली, क्योंकि उन्हें यह दिखाया कि प्