अस्पताल बीमार है, मरीज बेहाल — राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंदगी का ग्रहण

सिविल डिस्पेंसरी बाग सेवनिया के आसपास कचरा और जलभराव से लोग परेशान, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार बेखबर भोपाल।
शासन-प्रशासन एक ओर लोगों को बीमारियों से बचाने और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं राजधानी भोपाल के वार्ड नंबर 54, जोन नंबर 13 स्थित सिविल डिस्पेंसरी बाग सेवनिया के आसपास के हालात इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।

डिस्पेंसरी के आसपास जगह-जगह कचरे के ढेर और बारिश के बाद जलभराव ने मरीजों तथा स्थानीय रहवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को ही गंदगी और कीचड़ के बीच से गुजरना पड़ रहा है। परिसर में पानी जमा होने से मरीजों के अस्पताल तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग और शासन बीमारियों से बचाव के लिए लगातार दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं, तो राजधानी के ही एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के आसपास सफाई व्यवस्था क्यों दम तोड़ रही है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते नजर आते हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और कचरा तक साफ नहीं कराया गया।
जब अस्पताल के आसपास ही गंदगी, कीचड़ और मच्छरों का डेरा हो तो स्वस्थ समाज का सपना आखिर कैसे पूरा होगा? भोपाल के कई इलाकों में सड़क, नाली, जलभराव और स्वच्छ पेयजल जैसी समस्याओं को लेकर नागरिक परेशान हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि नगर निगम की जिम्मेदारी क्या सिर्फ टैक्स वसूलने तक सीमित रह गई है?
पुराने भोपाल से लेकर शहर के कई हिस्सों तक यदि यही तस्वीर बनी रही तो विकास के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। जिम्मेदार अधिकारियों से जनता की सीधी मांग है—बाग सेवनिया सिविल डिस्पेंसरी के आसपास तत्काल सफाई कराई जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित की जाए।
क्योंकि अस्पताल का काम मरीजों का इलाज करना है, लेकिन अगर अस्पताल ही गंदगी और जलभराव से जूझता नजर आए तो सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, पूरी व्यवस्था की सेहत का है।