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अयोध्या की पंचायतों में 4 महीने में 77 करोड़ खर्च:प्रशंसकों ने 98% बजट किया खत्म, पुरानी कार्ययोजनाओं पर खर्च हो रही रकम

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
अयोध्या की पंचायतों में 4 महीने में 77 करोड़ खर्च:प्रशंसकों ने 98% बजट किया खत्म, पुरानी कार्ययोजनाओं पर खर्च हो रही रकम

अयोध्या के ग्राम पंचायतों में सरकारी धन खर्च करने की रफ्तार बुलेट ट्रेन जैसी हो गई है। जिले की 772 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के कार्यकाल के चार महीने में ही दोनों वित्त आयोगों की करीब 78.40 करोड़ रुपये की धनराशि में से लगभग 77 करोड़ रुपये खर्च हो गए। यानी कुल बजट का 98 फीसदी से अधिक हिस्सा खर्च किया जा चुका है।

खास बात यह है कि इस दौरान नए कार्यों के प्रस्ताव जिलाधिकारी के अनुमोदन के लिए नहीं भेजे गए। पंचायतों में पुरानी कार्ययोजनाओं के अधूरे कामों पर ही धनराशि खर्च की जा रही है। 78.40 करोड़ में सिर्फ 78.57 लाख रुपये बचे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पंचम राज्य वित्त आयोग की धनराशि का 99.29 प्रतिशत और 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की राशि का 98.41 प्रतिशत खर्च हो चुका है।

दोनों आयोगों की कुल 78 करोड़ 40 लाख रुपये की धनराशि में से करीब 77 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। तीन अक्टूबर तक ग्राम पंचायतों के खातों में महज 78.57 लाख रुपये शेष होने की जानकारी सामने आई है। 26 मई को खत्म हुआ था प्रधानों का कार्यकाल जिले की 772 ग्राम पंचायतों में निर्वाचित ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था।

इसके बाद प्रदेश सरकार ने पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी पूर्व प्रधानों को प्रशासक के रूप में सौंप दी। प्रशासकों को जिम्मेदारी संभाले चार महीने से अधिक समय बीत चुका है। इस अवधि में नए कार्यों के प्रस्ताव जिलाधिकारी के अनुमोदन के लिए नहीं भेजे गए हैं। नए कामों के लिए डीएम की मंजूरी जरूरी ग्राम पंचायतों में नए कार्य शुरू कराने के लिए प्रशासकों को जिलाधिकारी से अनुमोदन लेना जरूरी है।

इसके लिए कार्यों का आगणन तैयार कर प्रस्ताव भेजना होता है। लेकिन अब तक किसी भी ग्राम पंचायत से नए कार्य का आगणन अनुमोदन के लिए नहीं पहुंचा है। ऐसे में पुरानी कार्ययोजनाओं में शामिल अधूरे कार्यों को पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है। हैंडपंप मरम्मत, नाली और इंटरलॉकिंग पर खर्च जिला पंचायतराज अधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि नए कार्यों के अनुमोदन के लिए ग्राम पंचायतों से अब तक कोई आगणन नहीं आया है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पंचायतों में काम नहीं हो रहे हैं। प्रशासक पुरानी कार्ययोजनाओं के शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर करा रहे हैं। इनमें हैंडपंप मरम्मत, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, रिबोर और परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प के तहत होने वाले कार्य शामिल हैं। अब निगाह इस पर है कि चार महीने में खर्च हुई करीब 77 करोड़ रुपये की धनराशि किन कार्यों पर खर्च की गई और इन कार्यों की प्रगति क्या है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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