'बच्चे बीमार हैं, बाढ़ के कारण डॉक्टर नहीं आते':चूल्हे भी डूब चुके, गांव छोड़ रिश्तेदारों के यहां जा रहे ग्रामीण; गांव में 5 हजार की आबाद प्रभावित
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →पानी मेरे आंगन में घुस चुका है, चूल्हा-चौका बंद है, बच्चे भी बीमार हैं, डॉक्टर कहते हैं, आपके यहां पानी है, नहीं आएंगे। मदद किससे लें, गांव की ज्यादातर महिलाएं मायके चली गई हैं, कुछ रिश्तेदारों के यहां। बेगुसराय की रहने वाली सरस्वती ने दैनिक भास्कर से बाढ़ के कारण आई परेशानियों को एक-एक कर बताया।
दरअसल, बेगूसराय के 7 प्रखंड के 35 गांव में करीब 1 लाख से ज्यादा आबादी पानी में है। इनमें तेघड़ा प्रखंड की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, यहां के भगवानपुर चक्की गांव की करीब 5 हजार की आबादी अभी सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां 4 फीट तक घर में पानी घुसा है। जिला मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है।
गांव में स्थिति इतनी बुरी है कि अगर बच्चे बीमार पड़ जाएं तो उन्हें दिखाने के लिए कोई डॉक्टर तक नहीं मिलता। बेगुसराय में बूढ़ी गंडक और गंगा बहती है। फिलहाल बूढ़ी गंडक में जलस्तर सामान्य है, जबकि गंगा उफान पर है। गंगा का पानी ही बेगूसराय में बाढ़ का कारण बना है।
जिले में गंगा का जलस्तर, गांव में कैसा है माहौल, किसी तरह की परेशानियों से जूझ रहे ग्रामीण, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट.... पहले बाढ़ से बने हालात की कुछ तस्वीरें... गांव की सड़कों पर पानी, नाव ही सहारा जिले में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। अभी गंगा खतरे के निशान से करीब 80 सेंटीमीटर ऊर पहुंच चुका है।
जिससे सबसे प्रभावित तेघड़ा प्रखंड स्थित भगवानपुर चक्की गांव है। भास्कर की टीम गांव के पास पहुंची तो गांव में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं मिला। सभी सड़कों पर बाढ़ का पानी था। पानी से होकर कुछ लोग आना-जाना कर रहे थे, पर उन्हें गिरने का डर था।
भास्कर टीम ने ग्रामीण से पूछा कि गांव में जाने का कोई साधन तो उन्होंने कहा कोई साधन नहीं है। नाव से जाना होगा। नाव के बारे में पता किया तो पता चला नाव सरकारी नहीं बल्कि ग्रामीणों के हैं। गांव में जाने के बाद पता चला लोग पानी में ही जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे थे।
किसी को बीमारी का डर तो किसी तो हादसे का डर सता रहा था। गांव के कई ऐसे लोग हैं जिनका सामान पानी में बर्बाद हो गया। अनाज भी पानी में भीग चुका है। कोई गांव से बाहर जाने की बातें कर रहा तो कोई किसी तरह छत पर रह रहा था।
कई महिलाएं बच्चों को लेकर गांव से बाहर रिश्तेदारों के घर गई ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले भी गंगा का जलस्तर बढ़ा था, जिससे गांव में पानी भर गया था। 2-3 दिन बाद पानी थोड़ा कम हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन 2 दिन से गंगा के जलस्तर में अचानक उछाल आया है।
गांव का प्रखंड, थाना और जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क पूरी तरह कट चुका है। गांव की अधिकांश महिलाएं बच्चों को लेकर मायके या अन्य रिश्तेदारों के यहां चली गई है। पानी लगातार बढ़ने से आने-जाने का एकमात्र साधन नाव ही हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक एक भी सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है।
ग्रामीणों को किस तरह की परेशानी हो रही है, बताई आपबीती.... ऐसे हालात में रहना मौत को दावत देने जैसा सरस्वती देवी ने बताया कि पति घर पर नहीं हैं, वे काम के सिलसिले में बेंगलुरू गए हैं। जब घर में पानी भर गया और बच्चे बीमार पड़ने लगे, तो मैंने फोन करके उन्हें सब बात बताई।
उनसे पूछकर मैं अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके लखीसराय जा रही हूं। जब गांव का पानी पूरी तरह सूख जाएगा, तभी हम वापस आएंगे। ऐसे हालात में बच्चों को लेकर यहां रहना मौत को दावत देने जैसा है। चूल्हे डूबे तो चूड़ा खाकर कट रही जिंदगी ग्रामीण अशोक कुमार ने कहा कि हमलोग पूरी तरह से भगवान भरोसे दिन काट रहे हैं।
घर के अंदर पानी घुस चुका है। चूल्हे पानी में डूब चुके हैं। नीचे रहने की जगह नहीं बची है, इसलिए पूरा परिवार छत पर किसी तरह रह रहा है। सरकार की तरफ से तिरपाल या पन्नी मिल जाती तो छत पर ढंककर रहने में थोड़ी राहत मिलती, लेकिन वह भी नहीं मिली है। पशुपालन के सहारे जीवन यापन करते हैं।
लेकिन सब घास डूब गई, अब दूसरे गांव से मंहंगे दाम पर हरा चारा खरीद कर लाते हैं। छाती भर पानी में रह रहे, न राशन मिला न डॉक्टर अनुज देवी ने कहा कि प्रशासन की तरफ से न तो नाव दी गई है और न ही रहने-खाने का कोई इंतजाम किया गया है। छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिन्हें लेकर हम बेहद डरे हुए हैं।
पानी इतना बढ़ गया है कि बच्चों के डूबने का डर रहता है। घर में चूल्हा-चौका बंद है। कोई साधन नहीं है कि कहीं जाकर राशन या पीने का पानी ला सकें। बीमारी की हालत में स्थिति और भयावह हो जाती है। गांव में अगर कोई बीमार पड़ जाए तो डॉक्टर के पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। न पन्नी मिली है और न ही खाने-पीने की राहत सामग्री।
हम लोग पानी के बीच बैठकर रातें गुजार रहे हैं। सरकार और प्रशासन हम गरीबों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। बीमारियों और जहरीले जीवों का खतरा बढ़ा गांव में चारों तरफ फैले बाढ़ के पानी के कारण अब संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। पानी जमा होने से जहरीले सांपों और कीड़े-मकोड़ों का खौफ बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के इस्तेमाल से बच्चों में पेट दर्द, डायरिया और त्वचा संबंधी बीमारियां फैलने लगी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम या दवाई गांव तक नहीं पहुंची है।
प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों की पोल खुली भगवानपुर चक्की गांव के ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में कम से कम 4-5 बड़ी सरकारी नावें तुरंत शुरू की जाए, जिससे लोग सुरक्षित आ-जा सकें। प्रभावित परिवारों को सूखा राशन चूड़ा, गुड़, सत्तू, माचिस, मोमबत्ती और प्लास्टिक शीट बांटे जाएं।
कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) शुरू कर भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था हो। गांव में डॉक्टरों की टीम भेजी जाए और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाए। लोगों का कहना है कि अगर जल्द प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची, तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती है।
वार्ड सदस्य बोले- ब्लॉक के चक्कर काट रहे, पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा भगवानपुर चक्की वार्ड नंबर-14 के वार्ड सदस्य उदय महतो ने बताया कि हम पुरुष तो किसी तरह पानी में जरूरी कामों के लिए निकल जाते हैं, लेकिन महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए स्थिति सबसे खतरनाक हो गई है। बच्चे घर से न निकलें, इसके लिए उन्हें बंद रखना पड़ता है।
उदय महतो ने बताया कि पिछले दिनों जब बाढ़ आई थी, तब अंचलाधिकारी (CO) के निरीक्षण के दौरान ही गांव का एक बच्चा पानी में डूब गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतने चिंतित हैं के अधिकांश महिलाओं और बच्चों को गांव से बाहर रिश्तेदारों के यहां भेज दिया गया है।
हम पंचायत प्रतिनिधि होने के नाते रोजाना ब्लॉक और अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। कल भी ब्लॉक गए थे। अधिकारियों ने कहा कि मल्लाहों से बात हुई है, नाव भेज रहे हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io