बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम पर SC ने जतायी चिंता, कहा-फिजिकल एक्टिविटी जरूरी
Date- 20 August 2026, Delhi सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि आजकल बच्चे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में ज्यादा उलझे हुए हैं। ऐसे में बच्चों के लिए शारीरिक गतिविधि यानी फिजिकल एक्टिविटी बहुत जरूरी है।
कोर्ट खेलों को भारतीय संविधान के भाग 3, अनुच्छेद 21ए के तहत मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त न्याय मित्र यानी अमाइकस क्यूरी ने कहा कि हर स्कूल में अनिवार्य रूप से फिजिकल एक्टिविटी होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अमाइकस की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता से जवाब मांगा है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। यह याचिका ‘स्पोर्ट्स: अ वे ऑफ लाइफ’ एनजीओ के अध्यक्ष और खेल शोधकर्ता डॉ. कनिष्का पांडे ने दाखिल की है। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा और खेलों के बीच कोई भेदभाव न करें।
खेलों को स्कूल पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। यह व्यवस्था नर्सरी से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएट स्तर तक लागू हो। साथ ही, याचिका में कहा गया है कि स्कूलों के बजट में खेलों के लिए एक निश्चित हिस्सा अनिवार्य रूप से तय किया जाए। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
कोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि वह बच्चों में बढ़ती स्क्रीन टाइम की आदत को लेकर चिंतित है और चाहता है कि स्कूलों में खेलों को बराबर महत्व मिले। बच्चों का ज्यादा स्क्रीन टाइम (मोबाइल, टीवी, टैबलेट) उनके मानसिक, शारीरिक और भाषाई विकास पर बुरा असर डालता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 2 साल से छोटे बच्चों का स्क्रीन टाइम शून्य होना चाहिए जबकि बड़े बच्चों के लिए इसे सीमित रखना जरूरी है।