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बच्चों की बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार के लिए जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र को सुद्रण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन कार्यक्रमों की समीक्षा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बच्चों की बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार के लिए जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र को सुद्रण करने के निर्देश, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने की राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन कार्यक्रमों की समीक्षा

भोपाल, 29 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश में बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए हैं। भोपाल स्थित निवास कार्यालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), एनीमिया मुक्त भारत अभियान और आशा कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और आमजन तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया।

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालयों में संचालित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों (डीईआईसी) में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने और रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों की समय पर पहचान होने से उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर 4डी के अंतर्गत चिह्नित बच्चों की स्क्रीनिंग से लेकर उपचार पूरा होने तक की जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए।

एनीमिया की पहचान से उपचार तक नियमित निगरानी

एनीमिया मुक्त भारत अभियान की समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के माध्यम से एनीमिया की आशंका वाले सभी पात्र हितग्राहियों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एनीमिया की पुष्टि होने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाए और उपचार के बाद नियमित फॉलोअप किया जाए।

उन्होंने हितग्राहियों की उपचार संबंधी प्रगति का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने और अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया। नियमित जांच, उचित उपचार और निरंतर निगरानी से एनीमिया नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सकता है।

आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आशा कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की आवश्यकता का आकलन करने और जरूरत के अनुसार नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 63,371 ग्रामीण आशा कार्यकर्ता, 5,051 आशा पर्यवेक्षक और 4,125 शहरी आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी प्रभावी उपलब्धता से लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देने, जरूरतमंद हितग्राहियों तक पहुंचने और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों को स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सेवाओं की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रभाकर तिवारी, डॉ. निधि शर्मा, डॉ. राकेश बोहरे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार को सुनिश्चित करने के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए हैं। यह कदम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चल रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, एनीमिया मुक्त भारत अभियान और आशा कार्यक्रम की समीक्षा के पश्चात आया है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों में रोगों का प्रारंभिक पता न चलने से उनका विकास प्रभावित हो सकता है। सुदृढ़ केंद्रों से जांच, उपचार और जागरूकता बढ़ेगी, जिस

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।