बाड़मेर में कृषक गोष्ठी, जैविक खेती और पशुपालन को बढ़ावा देने पर जोर
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बाड़मेर में आयोजित कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद में उन्नत खेती, जैविक कृषि और देशी पशु नस्लों के संरक्षण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने थारपारकर नस्ल की ब्रीडिंग, किसान उत्पादक संगठन बनाने और किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर जोर दिया।
बाड़मेर, 09 अक्टूबर। जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को कृषि वैज्ञानिक एवं किसान संवाद के साथ कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कृषि विशेषज्ञों और जयपुर से आए प्रगतिशील किसानों ने जिले के किसानों को उन्नत खेती, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। गोष्ठी में जैविक खेती, देशी पशु नस्लों के संरक्षण, नई फसलों और सरकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाकर सामूहिक रूप से कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित कर कृषि उपज को बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
गोष्ठी में देशी पशु नस्लों के संरक्षण और पशुपालन को आय का बेहतर माध्यम बनाने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गिर गाय के दूध, घी और पनीर की बाजार में अच्छी मांग है। वहीं, बाड़मेर की स्थानीय जलवायु को देखते हुए थारपारकर नस्ल की ब्रीडिंग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नस्ल क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल है और पशुपालन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में किसानों को नई कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और खेती के साथ पशुपालन को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की आवश्यकता बताई।
इस अवसर पर जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक बनवारीलाल, उप निदेशक पदमसिंह भाटी सहित विभिन्न कृषि विशेषज्ञ और बाड़मेर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
बाइट-डा.राजेश मान, सेवानिवृत निदेशक, पशुपालन विभाग,राजस्थान।
बाइट-सुरेन्द्र अवाना, प्रगतिशील किसान।
बाइट-खुमानसिंह, किसान