बदायूं में पुलिस हिरासत से आरोपी फरार:पुलिस हिरासत से फरार होने पर दारोगा समेत 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बदायूं की सिविल लाइंस कोतवाली में सोमवार शाम मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में पकड़ा गया आरोपी पुलिस हिरासत से फरार हो गया। आरोपी के भागने की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले में लापरवाही बरतने पर एसएसपी अंकिता शर्मा ने एक दारोगा और दो सिपाहियों को निलंबित कर दिया है।
तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। फरार आरोपी की पहचान फिरोजपुर इकलहरी गांव निवासी सुरजन सिंह यादव (38) के रूप में हुई है। सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने उसे सोमवार को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, साल 2025 में दर्ज मारपीट और जानलेवा हमले के एक मामले में उसकी तलाश चल रही थी।
पूछताछ के दौरान पुलिस को चकमा देकर भागा गिरफ्तारी के बाद सुरजन सिंह को सिविल लाइंस कोतवाली लाया गया था। यहां पुलिसकर्मी उससे पूछताछ कर रहे थे। इसी दौरान वह पुलिस की नजर बचाकर कोतवाली से फरार हो गया। आरोपी के भागने की जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मियों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन तत्काल उसका पता नहीं चल सका।
लापरवाही पर दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित आरोपी के पुलिस हिरासत से फरार होने को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी अंकिता शर्मा ने कार्रवाई की। उन्होंने दारोगा सचिन यादव, सिपाही सतेंद्र कुमार और सिपाही सनी वर्मा को निलंबित कर दिया। तीनों पुलिसकर्मियों की भूमिका और लापरवाही की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
आरोपी के खिलाफ अलग से केस दर्ज पुलिस हिरासत से फरार होने के मामले में सिविल लाइंस कोतवाली में सुरजन सिंह के खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि वह किस तरह हिरासत से बाहर निकला और फरार होने के बाद किस रास्ते से गया। संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी आरोपी की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं।
टीमें उसके गांव, आसपास के इलाकों और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस उसके परिचितों और रिश्तेदारों से भी जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए लगातार तलाश अभियान चलाया जा रहा है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
पुलिस हिरासत से फरार होने के बाद भी न्याय की राह पर चलना चाहिए। यदि कोई विवाद हो, तो कानूनी मार्ग अपनाएँ, न कि हिंसा। समाज में सहिष्णुता और संवाद को बढ़ावा दें, ताकि संघर्षों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। पीड़ितों के प्रति सहानुभूति और समर्थन दिखाएँ, और अपराधियों को सज़ा के साथ-साथ पुनर्वास का अवसर दें। इस तरह हम एक सुरक्षित, समावेशी और न्यायपूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।