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बागेश्वर में हुड़के की थाप पर झोड़ा-चांचरी लोकगीत और नृत्य की अनूठी परंपरा, पहाड़ी संस्कृति को बनाती है जीवंत

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बागेश्वर में हुड़के की थाप पर झोड़ा-चांचरी लोकगीत और नृत्य की अनूठी परंपरा, पहाड़ी संस्कृति को बनाती है जीवंत

बागेश्वर जिले के दानपुर क्षेत्र में झोड़ा और चांचरी लोकगीतों की परंपरा आज भी पहाड़ की संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है. मेलों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक समारोहों में लोग सामूहिक रूप से झोड़ा-चांचरी गाते हैं. खासकर महिलाएं पारंपरिक अंदाज में गोल या अर्धगोले में खड़ी होकर नृत्य करती हैं.

एक-दूसरे के कंधे या कमर पर हाथ रखकर कदम से कदम मिलाया जाता है. गीत और नृत्य के इस मेल में पहाड़ की पुरानी जीवनशैली, आपसी मेलजोल और सामूहिक भावना साफ दिखाई देती है.

📡 स्रोत: News18 Hindi

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