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बैंक अफसर बनकर फोन... फिर OTP- CVV लेते साइबर ठग और मिनटों में साफ कर देते खाता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बैंक अफसर बनकर फोन... फिर OTP- CVV लेते साइबर ठग और मिनटों में साफ कर देते खाता

^बैंक मैनेजर की शिकायत पर मामले की जांच कराई गई थी। बड़ा मामला होने पर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। उसके बाद टीम बनाकर दिल्ली के वेस्ट उत्तम नगर पिलर नंबर 680 के पास स्थित एक भवन में दबिश देकर फर्जी कॉल सेंटर को पकड़ा है। यहां क्रेडिट कार्ड के नाम पर साइबर ठगी का खेल चल रहा था।

अभी ठगों के खातों और अन्य लोगों के जुड़े होने की जांच चल रही है। मामले की जांच साइबर क्राइम थाना डीग के सीओ वीरेंद्र पाल कर रहे हैं। -कांबले शरण गोपीनाथ, एसपी, डीग भास्कर न्यूज | भरतपुर फोन की दूसरी तरफ आवाज आती थी- ‘मैं एक्सिस बैंक से बोल रहा हूं...

आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ानी है।’ इसके बाद शुरू होता था भरोसा जीतने का खेल। कभी कार्ड रिन्यूअल, कभी KYC अपडेट तो कभी बैंकिंग सुविधा के नाम पर ग्राहक से OTP, CVV, PAN, जन्मतिथि और Gmail की जानकारी हासिल की जाती और फिर इन्हीं जानकारियों के सहारे ऑनलाइन खाते और वित्तीय साधनों पर सेंध लगा दी जाती।

यह कोई छोटा-मोटा साइबर गिरोह नहीं, बल्कि दिल्ली के उत्तम नगर में तीन मंजिला बिल्डिंग से बाकायदा कॉल सेंटर चलाने वाला संगठित नेटवर्क था। यहां युवक-युवतियों को नौकरी देकर पहले ट्रेनिंग दी जाती, फिर उन्हें बैंक अधिकारी बनकर लोगों को ठगने के लिए तैयार किया जाता था।

डीग पुलिस ने ‘ऑपरेशन काउंटडाउन’ के तहत इस पूरे नेटवर्क पर प्रहार करते हुए 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया, दो नाबालिगों को रेस्क्यू कर 88 एंड्रॉयड मोबाइल जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान फर्जी कॉल सेंटर में 85 लोग मिले। इनमें युवक-युवतियों के साथ दो नाबालिग भी शामिल थे।

जांच के बाद 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 19 युवक-युवतियों को पूछताछ के बाद उनके परिजनों के साथ रवाना कर दिया गया। दरअसल, मामला एक्सिस बैंक डीग के शाखा प्रबंधक फूलसिंह की रिपोर्ट के बाद सामने आया। मामले की प्राथमिक जांच सीओ साइबर थाना वीरेंद्र बिश्नोई ने की थी।

पुष्टि होने के बाद आईजी डॉ प्रीति चंद्रा के नेतृत्व में गठित टीम ने दिल्ली में दबिश दी। दिल्ली में टीम को एएसपी दिनेश यादव ने लीड किया। . पहले रेकी की फिर छापा... दिल्ली पहुंची करीब 60 सदस्यीय टीम में 6 सदस्य सादा कपड़ों में थे। टीम को पहले मुख्य केंद्र से करीब आधा किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था।

उसके बाद इंस्पेक्टर मनीष शर्मा के नेतृत्व में सादा वर्दी में मौजूद सदस्य रेकी करने पहुंचे। दोनों मंजिलों पर ठग बेहिचक काम कर रहे थे। इंस्पेक्टर ने अपनी टीम को सूचना दी और एक साथ पूरी टीम ने दोनों मंजिलों पर धावा बोल दिया।

सबसे पहले मुख्य आरोपी जो लेपटॉप लेकर काम रहा था, उसे पकड़ा बाद में अन्य सदस्यों के मोबाइल जब्त कर सभी को एक जगह इकठ्ठा कर जांच शुरू की। फर्जी आईडी कार्ड से बैंक अफसर बनते, वेबसाइट भी बनाई गिरोह ने ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए एक्सिस बैंक के नाम और लोगो का इस्तेमाल किया।

आरोपियों के पास पुलिस को Axis Bank, Yes Bank और HDFC Bank के अधिकारियों के फर्जी आईडी कार्ड भी बरामद हुए हैं। गिरोह ने बैंक के नाम से फर्जी वेबसाइट तक तैयार कर रखी थी। आरोपी पहले ग्राहक को फोन करते और खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताते।

क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू करने या KYC अपडेट करने के नाम पर बातचीत आगे बढ़ाते। . जॉब पोर्टल से रिज्यूमे निकालकर बेरोजगारों को बनाते थे ‘साइबर ठग’... जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ कॉल करने वालों तक सीमित नहीं था।

आरोपी WorkIndia और दूसरे जॉब पोर्टल से बेरोजगार युवाओं के रिज्यूमे निकालते थे। इसके बाद फर्जी कंपनी में नौकरी का झांसा देकर उन्हें दिल्ली बुलाया जाता। इंटरव्यू और ट्रेनिंग के बाद उन्हें कॉल सेंटर में काम दिया जाता था। किसी को टीम लीडर तो किसी को कर्मचारी बनाया गया था।

कर्मचारियों को 11 से 15 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाता था। जो कर्मचारी ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाता, उसे वेतन के अलावा अतिरिक्त कमीशन भी मिलता था। गिरोह ने नाबालिग बच्चों तक को इस नेटवर्क में शामिल कर रखा था। . स्क्रिप्ट पढ़कर करते थे कॉल, हजारों लोगों का डेटा मिला...

साइबर ठग ग्राहकों से फोन और वाट्सएप के जरिए संपर्क करते थे। उन्हें बाकायदा लिखित स्क्रिप्ट दी जाती थी, जिसमें ग्राहक को विश्वास में लेने से लेकर बैंकिंग जानकारी हासिल करने तक की पूरी बातचीत तैयार रहती थी। छापेमारी में पुलिस को बड़ी मात्रा में ग्राहकों का बल्क डेटा मिला है।

इसमें नाम, बैंक अकाउंट, PAN कार्ड, पते और अन्य बैंकिंग जानकारियां शामिल हैं। एक ही व्यक्ति के नाम पर कई सिम कार्ड इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। . आजमगढ़ का आकाश गिरोह का मुख्य सदस्य, करोड़ों के ट्रांजेक्शन की जांच...

बैंक की प्रारंभिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आकाश पुत्र रामप्रकाश निवासी बनकट, थाना ताहवरपुर, जिला आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) को गिरोह के मुख्य सदस्यों में शामिल माना है। पुलिस अब गिरोह के बैंक खातों, मोबाइल, सिम कार्ड और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है।

शुरुआती जांच में पुलिस को तीन खातों में करीब 6 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी मिली है। पुलिस अन्य बैंक खातों की भी जानकारी कर रही है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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