बैंक हड़ताल की नई तारीख आई सामने, अब यूनियन ने दी अनिश्चितकालीन विरोध की चेतावनी
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आज यानी कि 28 सितंबर से बैंक कर्मचारी तीन दिन के लिए हड़ताल पर जाने वाले थे, लेकिन कल रविवार की देर रात इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच हुई बैठक के बाद फिलहाल इसे टाल दिया गया है.
इसके चलते बैंक में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहेगा.
रविवार रात 9:30 बजे हुई बैठक में बैंक कर्मचारियों के लिए 5-डे वर्किंग वीक के मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई.
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सी.एच.
वेंकटचलम के अनुसार, 5-डे बैंकिंग (सप्ताह में पांच दिन काम) की मांग को लागू किए जाने और इस पर विचार किए जाने के लिए करने के लिए एक संयुक्त हाई-लेवल कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है.
साथ ही परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और दूसरे लंबित मुद्दों पर भी आगे द्विपक्षीय बातचीत जारी रखने को लेकर सहमति बनी है.
Bank strike deferred after the meeting between the Indian Banks' Association (IBA) and the United Forum of Bank Unions (UFBU) tonight. pic.twitter.com/SPJUwp63p2
ANI (@ANI) September 27, 2026
यूनियन ने दे डाली चेतावनी
बेशक 28-30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल स्थगित हो गई है, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई है.
यूनियनों ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि अगर नई बनी कमेटी और सरकार के साथ आगे होने वाली बातचीत में उनकी मांगों का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो 26 अक्टूबर 2026 से देशभर में अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल शुरू की जा सकती है.
बैठक में किन बातों का हुआ जिक्र?
UFBU के सर्कुलर के अनुसार, दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा बाकी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने की मांग पर चर्चा करने के लिए तुरंत एक हाई-लेवल कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें IBA और UFBU के प्रतिनिधि शामिल होंग
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में लगातार चल रही श्रम विवादों का हिस्सा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंकिंग सेवाओं पर निर्भर रोजमर्रा की जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ता है। यदि हड़ताल जारी रहती है तो जमा, ऋण, एटीएम तथा ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सुविधाएँ प्रभावित हो सकती हैं, जिससे लोगों की वित्तीय गतिविधियाँ बाधित होंगी। इससे उपभोक्ताओं को असुविधा, व्यापारिक लेनदेन में देरी और आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।