बैंक जॉब से आजादी, महिला ने 2 लाख का बांड भरकर छोड़ी 12 घंटे वाली नौकरी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
सरकारी बैंक की नौकरी को आमतौर पर सुरक्षित करियर और अच्छी सैलरी से जोड़कर देखा जाता है.
अगर आप भी अच्छी सैलरी वाली नौकरी को ही सफलता का पैमाना मानते हैं, तो यह खबर आपको हैरान कर देगी. पश्चिम बंगाल की 31 साल की मधुरिमा के यही नौकरी मानसिक तनाव की वजह बन गई.
उन्होंने सरकारी बैंक की नौकरी हासिल करने के लिए करीब दो साल तक तैयारी की थी.
हालांकि, नौकरी मिलने के साथ उन्हें करीब 70,000 रुपये की सैलरी और मकान किराया भत्ता भी मिलता था.
लेकिन बाद में लंबे काम के घंटे, छुट्टी की परेशानी और काम का दबाव इतना बढ़ गया कि आखिरकार उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया.
लेकिन नौकरी छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये का बॉन्ड भी भरना पड़ा और नई नौकरी में उनकी सैलरी करीब आधी रह गई.
क्या है पूरा मामला?
मधुरिमा के मुताबिक, बैंक में काम के दौरान उन्हें रोजाना करीब 12 घंटे से ज्यादा समय देना पड़ता था. कई बार सुबह 8:30 बजे शुरू हुआ काम रात 10:30 बजे तक चलता था.
सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि उन्हें रविवार को भी बैंक जाना पड़ता था.
साथ ही कैश काउंटर की जिम्मेदारी के दौरान लंबे समय तक ब्रेक नहीं मिलता था, जिसके कारण उन्हें यूरिन इंफेक्शन की परेशानी भी हुई थी.
उनका दावा है कि इसके बावजूद उन्हें बीमारी की छुट्टी लेने में परेशानी हुई और उन्हें काम पर जाना पड़ता था. जिसके कारण इस माहौल का उनकी सेहत और निजी जिंदगी पर भी बुरा काफी असर पड़ा.
बैंक के काम के बाद भी करना पड़ता था फील्ड वर्क
मधुरिमा ने बताया कि कैश काउंटर का काम खत्म होने के बाद भी उन्हें एक्स्ट्रा काम दी जाती थीं.
शाम के समय उन्हें गांव में जाकर नए ग्राहक जोड़ने और बीमा पॉलिसी बेचने जैसे टारगेट भी पूरे करने पड़ते थे.
उनका कहना था कि शाम के बाद अकेले गांव में जाकर लोगों से संपर्क करना उनके लिए मुश्किल और असुरक्षित था.
मधुरिमा के मुताबिक, लगातार काम और दबाव का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा.
उनका कहना था कि वह काम से लौटने के बाद
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर एक 31 वर्षीय महिला के बैंक नौकरी छोड़ने के निर्णय के बारे में है, जिसने 2 लाख रुपये का बांड भरकर 12 घंटे की नौकरी से आज़ादी पाई। बैंक की नौकरी को अक्सर सुरक्षित करियर और अच्छी वेतन का प्रतीक माना जाता है, परंतु यहाँ दिखाया गया है कि मानसिक तनाव और कार्यस्थल के दबाव से जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पारंपरिक नौकरी के प्रति लोगों के दृष्टिकोण पर सवाल उठाती है और दिखाती है कि सफलता केवल वेतन से नहीं मापी जाती। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि वे