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बैंक मर्ज होने के बाद भी चलेगा पुराना चेक? हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बैंक मर्ज होने के बाद भी चलेगा पुराना चेक? हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

क्या दो बैंकों का मर्जर होने पर ग्राहकों को मिले चेक वैलिड होते हैं? क्या ये सवाल आपके मन में भी कभी आया है? यदि हां, तो हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसका जवाब दिया है.

दरअसल कोर्ट ने हाल ही में ऐसे ही एक मामले में सुनवाई की है और बाताया है कि अगर किसी बैंक का दूसरे बैंक में विलय हो जाता है, तो सिर्फ इस वजह से उस बैंक का पहले से जारी किया गया चेक अमान्य नहीं हो जाता.

विलय के बाद पुराने बैंक की संपत्ति, देनदारियां और ग्राहक खाते नई बैंकिंग संस्था के पास चले जाते हैं.

ये मामला विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के मर्जर से जुड़ा हुआ है.

जिनका मर्जर साल 2019 में हो गया था.

इसके बाद एक महिला ने विजया बैंक के खाते से जारी किया गया चेक बैंक ऑफ बड़ौदा में लगाया था, लेकिन वो चेक भुगतान के लिए स्वीकार नहीं किया गया.

क्या है पूरा मामला? दरअसल एक महिला ने विजया बैंक का जारी किया हुआ चेक एक दूसरी महिला को दिया था, जिसे बैंक ऑफ बड़ौदा ने मान्य ना करते हुए अस्वीकृत कर दिया था.

जिसके बाद महिला ने इस मामले को कर्नाटक हाईकोर्ट के सामने रखा. मामले की सुनवाई करते जस्टिस गोविंदराज ने फैसला सुनाते हुए महिला का साथ दिया.

चेक नहीं दिया था शिकायतकर्ता को

चेक जारी करने वाली महिला ने कोर्ट में कहा कि उसने ये चेक शिकायतकर्ता को नहीं दिया था.

उनका दावा था कि चेक कहीं खो गया था और उसका गलत इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने ये भी तर्क दिया कि विजया बैंक अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उसका चेक भी मान्य नहीं होना चाहिए.

हाईकोर्ट ने अस्वीकार की दलील

कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.

कोर्ट ने कहा कि महिला का विजया बैंक में खाता था और संबंधित चेक उसी खाते से जुड़ा था, इस बात पर विवाद नहीं है. बैंक के विलय के बाद उस खाते की जिम्मेदारी बैंक ऑफ बड़ौदा की हो गई थी.

कोर्ट ने ये भी कहा कि चेक वास्तव में महिला ने जारी किया था या वो खो गया था, जिसका गलत इस्तेमाल हुआ, ये मामला ट्रायल कोर्ट में सबूतों के आधार पर तय किया

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

बैंक विलय के बाद भी पुराने चेक वैध रहते हैं, यह विषय है। हाई कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि विलय से पहले जारी चेक अमान्य नहीं होते। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ग्राहकों को अपने पुराने चेक पर भरोसा बना रहता है और बैंकिंग प्रक्रियाओं में अनिश्चितता कम होती है। आम जनता पर इसका असर यह है कि वे बिना किसी परेशानी के अपने चेक का उपयोग जारी रख सकते हैं, जिससे वित्तीय लेनदेन में स्थिरता और भरोसा बढ़ता है।

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