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बालाघाट- गोबर से गढ़ रहे हुनर की नई पहचान, कामथी के कारीगरों के उत्पाद नेपाल और यूके तक पहुंचे

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बालाघाट- गोबर से गढ़ रहे हुनर की नई पहचान, कामथी के कारीगरों के उत्पाद नेपाल और यूके तक पहुंचे

बालाघाट में मुलना स्टेडियम के पास 4 से 6 नवंबर तक आयोजित दीपांजलि आजीविका संगम मेला-2026 में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में कामथी के कारीगरों के गोबर से बने उत्पाद लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी में भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाओं से लेकर गौमाता एवं अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां, छोटे दीपक, लुभान, मोबाइल स्टैंड, आरती, एक्यूप्रेशर मैट, कंडे, मालाएं, दीवार घड़ी और तोरण द्वार सहित अनेक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। इसके साथ ही पड़ार घास से तैयार टोकनियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं।

कामथी के कारीगरों ने अपनी कल्पनाशीलता और पारंपरिक हुनर से गोबर को एक नया स्वरूप दिया है। इन उत्पादों के निर्माण में गोबर के साथ सेल्वट की गोंद, बीज, पत्तियां तथा मैदा और लकड़ी के पाउडर जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। इससे विभिन्न आकारों की मजबूत एवं आकर्षक कलाकृतियां तैयार की जाती हैं। खास बात यह है कि इन उत्पादों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए पर्यावरण अनुकूल सामग्री तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। दीपावली के अवसर पर गोबर से बने दीये, सजावटी सामग्री और धार्मिक प्रतीकों की मौजूदगी इन्हें विशेष आकर्षण प्रदान कर रही है।

कारीगरों ने बताया कि अपने उत्पादों का प्रचार-प्रसार और बिक्री बढ़ाने के लिए उन्होंने यू-ट्यूब चैनल बनाया है। इसके माध्यम से लोग उनके उत्पादों को देखते हैं और ऑनलाइन ऑर्डर देते हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के सहारे ग्राम कामथी में तैयार सामग्री देश के बड़े शहरों तक पहुंच रही है। इतना ही नहीं, नेपाल और यूके से भी उनके उत्पादों के ऑर्डर मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहकर स्थानीय संसाधनों से उत्पाद तैयार करने वाले इन कारीगरों ने डिजिटल माध्यमों को बाजार तक पहुंचने का प्रभावी जरिया बनाया है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग की इस प्रदर्शनी का उद्देश्य पशुपालन को केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित न रखते हुए गोबर एवं अन्य गौ-आधारित संसाधनों से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार, अतिरिक्त आय और आजीविका के नए अवसर मिल सकते हैं। कामथी के कारीगरों की यह पहल बताती है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर को रचनात्मकता तथा आधुनिक प्रचार माध्यमों से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाई जा सकती है।

दीपांजलि आजीविका संगम मेले में कामथी के कारीगरों की यह प्रदर्शनी न केवल उनकी कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित कर रही है, बल्कि यह भी संदेश दे रही है कि ग्रामीण अंचलों में रोजगार और आत्मनिर्भरता की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। जरूरत है तो बस स्थानीय हुनर को पहचान देने, उसे बेहतर मंच उपलब्ध कराने और बाजार से जोड़ने की।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।