बालाघाट से इंदौर तक मौतों और प्रशासनिक व्यवस्था पर जवाबदेही की माँग, जीतू पटवारी ने अमित शाह से पूछे छह बड़े सवाल
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भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में आदिवासी बच्चों की मौत, संदिग्ध जहरीली शराब, दूषित पेयजल, प्रशासनिक समन्वय और बढ़ते कर्ज को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। 2 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इन मामलों में केवल बयान देने के बजाय जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पटवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बालाघाट दौरा उन आदिवासी परिवारों के दुख-दर्द को समझने का प्रयास था, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। उन्होंने कहा कि तीन महीने से लेकर एक वर्ष, दो वर्ष, पांच वर्ष, 15 वर्ष और 17 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को खोने वाले परिवारों की पीड़ा पूरे प्रदेश की संवेदना और शासन की जवाबदेही का विषय है।
उन्होंने आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, शिक्षा और रोजगार की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई। पटवारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी विकास के लिए निर्धारित बजट के उपयोग में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की गई राशि का मदवार विवरण सार्वजनिक करने और यदि किसी प्रकार के दुरुपयोग की पुष्टि हो तो निष्पक्ष जांच की मांग की।
पटवारी ने कहा कि आदिवासी बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित शिक्षक, पर्याप्त स्कूल और बेहतर संसाधन मिलना चाहिए। किसी बच्चे का भविष्य उसके जन्मस्थान, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।
बालाघाट दौरे के दौरान जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति को लेकर भी पटवारी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अनुसार दौरे की पूर्व सूचना और मुख्य सचिव से संवाद के बावजूद दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति प्रशासनिक समन्वय और स्थापित प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारियों ने अपने दायित्वों का पालन नहीं किया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस विषय को विभिन्न सक्षम मंचों पर उठाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत, विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस, आईएएस और आईपीएस एसोसिएशनों के समक्ष विषय उठाने तथा राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को लिखित शिकायत भेजने की बात कही।
प्रशासनिक समन्वय को लेकर पटवारी ने भाजपा सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की ओर से सामने आई शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भाजपा की कोर कमेटी की बैठक से संबंधित खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल द्वारा अधिकारियों के मंत्रियों की बात नहीं सुनने की शिकायत का उल्लेख हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से संबंधित खबरों का भी उल्लेख किया, जिनमें अधिकारियों या मुख्यमंत्री के स्तर पर फोन और संवाद को लेकर शिकायतों की बात सामने आई थी।
पटवारी ने सवाल किया कि जब सरकार के भीतर ही मंत्री, मुख्यमंत्री और अधिकारी एक-दूसरे से समन्वय नहीं बना पा रहे हैं तो आम नागरिक की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। उन्होंने वन मंत्री नागर सिंह चौहान और मंत्री रामनिवास रावत के बीच सार्वजनिक मतभेदों, मंत्री प्रह्लाद पटेल द्वारा एसडीओ की नियुक्ति पर आपत्ति तथा जबलपुर में आईएएस अधिकारी अरविंद शाह को लेकर लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की।
मंत्री विजय शाह से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए पटवारी ने कहा कि किसी भी मंत्री को राजनीतिक पद के कारण जांच या कार्रवाई से विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।
पटवारी ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने एक महीने में तीन बार कर्ज लेने और प्रदेश का कुल कर्ज लगभग चार लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से कुल कर्ज, ब्याज भुगतान, नए ऋण और उसके उपयोग का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान कर्ज का कितना हिस्सा विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर खर्च हुआ है। पटवारी ने मुख्यमंत्री के लिए विमान और हेलीकॉप्टर जैसी सुविधाओं पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल उठाते हुए सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं का पारदर्शी हिसाब देने की मांग की।
उन्होंने प्रति नागरिक लगभग 80 हजार रुपये के कर्ज के आंकड़े का भी उल्लेख किया और सरकार से इसकी गणना का आधार, कुल सार्वजनिक ऋण तथा राज्य की आबादी के आधार पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने को कहा।
पटवारी ने छिंदवाड़ा में दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौत, सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों और इंदौर में दूषित पेयजल की घटना को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े गंभीर प्रश्न सामने रखे हैं।
छिंदवाड़ा मामले में उन्होंने वास्तविक मृतक संख्या, दवा की गुणवत्ता, नियामकीय निगरानी, चिकित्सा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में आबकारी विभाग, अवैध शराब की आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग करते हुए उन्होंने पूछा कि अवैध शराब की बिक्री कैसे हुई और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इंदौर में दूषित पेयजल की घटना को लेकर पटवारी ने नगर प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता, पाइपलाइन और सीवेज व्यवस्था, शिकायतों पर कार्रवाई तथा प्रभावित परिवारों को दी गई राहत से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल जांच समितियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जहां भी लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मध्य प्रदेश दौरे के संदर्भ में पटवारी ने छह प्रमुख सवाल भी उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच संवादहीनता, छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत, सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतें, आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण एवं बुनियादी सुविधाओं की स्थिति, इंदौर में दूषित पेयजल और प्रदेश पर बढ़ते कर्ज तथा सरकारी खर्च से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मांगा।
पटवारी ने कहा कि यदि मंत्रियों की ओर से मुख्यमंत्री के फोन न उठाने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं तो सरकार में समन्वय की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के मामले में उन्होंने दवा की आपूर्ति और निगरानी में संभावित चूक की जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।
सागर की घटना पर उन्होंने अवैध शराब की आपूर्ति और निगरानी में संभावित लापरवाही की जांच तथा पीड़ित परिवारों को सहायता और न्याय दिलाने की मांग की। आदिवासी क्षेत्रों के संबंध में उन्होंने लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा संबंधी समस्याओं तथा आदिवासी विकास के लिए आवंटित धनराशि का मदवार हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।
इंदौर की घटना के संबंध में पटवारी ने पेयजल की गुणवत्ता, सीवेज व्यवस्था और नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई में हुई संभावित चूक की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। वहीं, प्रदेश के कर्ज को लेकर उन्होंने कुल ऋण, ब्याज भुगतान, नए कर्ज और उसके उपयोग का पूरा विवरण जनता के सामने रखने की मांग की।
पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन चाहिए। बच्चों की मौत, आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं, संदिग्ध जहरीली शराब, दूषित पेयजल और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संबंधित विभागों की समीक्षा कर जिम्मेदारियों का निर्धारण करने की मांग की। पटवारी ने कहा कि जिन मंत्रियों या अधिकारियों के विरुद्ध जांच में गंभीर लापरवाही प्रमाणित हो, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।