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बालाघाट- जिले में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा की जा रही है पहल, आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनकी रुचि के अनुसार दिया जा रहा रोजगारपरक प्रशिक्षण

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बालाघाट- जिले में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा की जा रही है पहल, आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनकी रुचि के अनुसार दिया जा रहा रोजगारपरक प्रशिक्षण

बालाघाट जिले में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनकी रुचि के अनुसार रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में स्थानीय पुलिस लाइन में बनाए गए प्रशिक्षण केंद्र में महिला और पुरुष आत्मसमर्पित नक्सली सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों ने साधारण ड्राइविंग, जेसीबी ड्राइविंग और सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों में रुचि जताई थी। उनकी पसंद के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही उन्हें विभिन्न गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल हो सकें।

जिले में पिछले दस महीनों में कई इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों को समाज में समाहित करना एक सकारात्मक कदम है, परंतु हिंसा के विकल्प के रूप में संवाद, सुलह और कानूनी मार्ग अपनाना चाहिए। समाज को यह सिखाना चाहिए कि संघर्ष का समाधान संवाद से होता है, न कि हथियारों से। रोजगार प्रशिक्षण से न केवल वे अपनी पहचान बदलते हैं, बल्कि समाज में शांति और समृद्धि भी आती है। पीड़ितों के प्रति संवेदना रखकर, हम एक सहानुभूतिपूर्ण और समावेशी समाज बना सकते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।