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बालाघाट में कोटेश्वर शिवलिंग का जलाभिषेक:आर्यावर्त के 108 उपलिंगों में उल्लेख, तंत्र-योग साधना का केंद्र रहा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बालाघाट में कोटेश्वर शिवलिंग का जलाभिषेक:आर्यावर्त के 108 उपलिंगों में उल्लेख, तंत्र-योग साधना का केंद्र रहा

सावन के तीसरे सोमवार को जिले के लांजी स्थित कोटेश्वर धाम में शिवभक्तों ने भगवान कोटेश्वर का जलाभिषेक किया। इस दौरान भक्तों ने अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगा। सावन मास में यहां बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। जिले के अलावा, पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी श्रद्धालु यहां आते हैं। मंदिर में रामायण पाठ का आयोजन किया जा रहा है और भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था भी की गई है। मान्यता है कि कोटेश्वर शिवलिंग का भगवान वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के उपलिंगों में विशेष स्थान है। इसे कोटिशलिंग के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि इसमें 33 करोड़ देवताओं की शक्तियां निहित हैं। प्राचीन लोककथाओं के अनुसार, अयोध्या के राजा श्रीराम के पूर्वज महाराज दधीच अपनी पत्नी सुवर्चा के साथ जीवन के अंतिम समय में यहां साधना के लिए आए थे। योग-साधना और तपस्या का केंद्र रहा मंदिर के प्राचीन इतिहास से पता चलता है कि आर्यावर्त के 108 उपलिंगों में इसका उल्लेख मिलता है। प्राचीन काल में यह स्थल तंत्र साधना, योग साधना और तपस्या के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध रहा है। मंदिर के ठीक सामने धूनी दरबार भी है, जिसे प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और यज्ञशाला माना जाता था। यहां स्थित सिद्ध वटवृक्ष के नीचे यह धूनी स्थल स्थित है। वर्ष 1995 में इस स्थान की खुदाई और पुनर्निर्माण के दौरान धूनी को वर्तमान स्वरूप दिया गया। सावन मास में भगवान कोटेश्वर के दर्शन करने वाले भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजन के बाद धूनी स्थल पर पहुंचकर भी पूजा करते हैं। धूनी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। पंडित विश्वनाथ तिवारी के अनुसार, जो भक्त कोटेश्वर शिवलिंग और धूनी दरबार के दर्शन करते हैं, उन्हें विशेष कृपा प्राप्त होती है। तस्वीरें देंखें...

📡 स्रोत: NewsData.io

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