बलरामपुरः पुनर्वास नीति ला रही है रंग, पूर्व नक्सली को मिला पक्का मकान
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जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर
छत्तीसगढ़ में शासन की पुनर्वास नीति अब रंग ला रही है..जिसका जीता जागता प्रमाण पहले कभी नक्सली कमांडर रहे सीताराम सोनवानी है..जिन्हें सरेंडर करने के बाद मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद शुरू हुई..और आज वे सरकार के तमाम योजनाओं का लाभ ले रहे है..पहले कभी मिट्टी के घर में जैसे तैसे जीवनयापन करने वाला सीताराम का परिवार अब प्रधानमंत्री आवास के पक्के घर में निवासरत है..सीताराम और उसका परिवार छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे है..पेश है खास रिपोर्ट!.
वी. ओ.1_पहले कभी कंधे पर बंदूक और जंगलों की पगडंडी पर खाक छान रहे सरकार की योजनाओं से कोसों दूर सीताराम सोनवानी ने 1998 में नक्सली संगठन को चुना था और नक्सली संगठन में एरिया कमांडर की भूमिका में रहे..और अपनी प्रेमिका के जिद के आगे सीताराम की एक ना चली..सीताराम ने 2005 में नक्सल गतिविधियों छोड़ दिया..
जान का खतरा था..इसलिए सीताराम अपनी पत्नी बिराजो के साथ अपना दाम्पत्य जीवन सुखमय बनाने असम चले गये..और मजदूरी कर जीवन बसर करने लगे..लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना ने सीताराम को अपने गांव वापस लौटने पर मजबूर कर दिया..साल 2021 के फरवरी के महीने में सीताराम ने बलरामपुर पुलिस के समक्ष सरेंडर किया..सीताराम 14 महीने जेल में भी रहे..लेकिन यही से उनकी जिंदगी की एक नई शुरुआत हुई..उन्हें शासन की योजनाओं के तहत मुख्यधारा में जोड़ने की कवायद तेज हुई..और वे जुड़ भी गये..अब सीताराम अपने प्रधानमंत्री आवास के पक्के मकान में रहते है..खेती किसानी करते है..
सीताराम कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नही था कि कभी उनके पास भी रहने के लिए पक्की छत मिल पाएगी लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति ने उनका जीवन बदल दिया और उन्होंने है कि उनको सरकार पर पूरा भरोशा है कि आगे भी सरकार मदद करती रहेगी ।
बाईट सीताराम सोनवानी पूर्व नक्सली कमांडर
वी. ओ.2..सीताराम की पत्नी बिराजो बताती है कि सीताराम से मिलने उन्होंने साल 2005 में एक चिट्ठी लिखी थी..और यही से दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत हुई..और दोनों ने साथ में रहने की कसमें खाई..सीताराम के नक्सली संगठन छोड़ने के बाद दोनों असम चले गये..14 साल असम में बिताया..और दो बच्चे भी हुए..फिर घर की याद सताने लगी तो लौट कर आ गए..लौटने के बाद बिराजो ने 10 वी की पढ़ाई अधूरी छोड़ रखी थी..जिसे तत्कालीन एसपी डॉ.लाल उमेद सिंह ने पूरी कराई..दंपत्ति के दोनों बच्चों के पढ़ाई का जिम्मा भी तत्कालीन एसपी ने ही उठाया..और बच्चे पढ़ाई भी कर रहे है..
बाईट बिराजो पत्नी
वी. ओ.3..इधर स्थानीय प्रशासन ने भी आत्मसमर्पित नक्सली और नक्सल पीड़ित परिवारों को शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ दिलाने का बीड़ा उठाया..जिले में 27 परिवार चिन्हित कर उन्हें स्पेशल प्रोजेक्ट में तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का छत दिलाने की कवायद शुरू हुई..और नतीजा 18 प्रधानमंत्री आवास योजना के घर अब बनकर तैयार हो चुके है .शेष में निर्माण कार्य जारी है!.
Byte 3_डॉक्टर आशुतोष चतुर्वेदी जिला पंचायत सीईओ