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Balochistan में इमरान अली की न्यायेतर हत्या पर UN experts ने जताई चिंता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Balochistan में इमरान अली की न्यायेतर हत्या पर UN experts ने जताई चिंता

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, आठ सितंबर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान के एक निवासी को “जबरन गायब किए जाने” और उसकी “न्यायेतर हत्या” को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए पाकिस्तान से मामले की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया है। विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान में इमरान अली की हत्या पर चिंता जताते हुए पाकिस्तान से उसे हिरासत में लिए जाने और उसकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच कराने का पिछले सप्ताह आग्रह किया था।

पिछले साल 27 अगस्त को आतंकवाद रोधी विभाग के करीब 20 अधिकारियों ने अली को उसके अपार्टमेंट से कथित तौर पर अगवा कर लिया था और वे उसे किसी अज्ञात स्थान पर ले गए थे। अली के परिवार को एक साल तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई कि वह कहां है और उसके साथ क्या हुआ। हालांकि, अली के साथ हिरासत में लिए गए कुछ लोगों ने रिहा होने के बाद पुष्टि की कि उसे हिरासत में रखा गया था।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि हिरासत के दौरान अली को कई दिनों तक कथित तौर पर यातनाएं दी गईं। विशेषज्ञों ने कहा, ‘‘अगर किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद अधिकारी यह मानने से इनकार कर दें कि वह उनकी हिरासत में है, या उसके बारे में अथवा उसके ठिकाने की जानकारी छिपाएं, तो इसे जबरन गायब किया जाना माना जाता है।

ऐसी स्थिति में पीड़ित कानून के संरक्षण से बाहर हो जाता है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के एक अनिवार्य सिद्धांत का उल्लंघन है।’’ जबरन गायब किए जाने के मामलों को देखने वाले पाकिस्तान के जांच आयोग के समक्ष पिछले माह हुई सुनवाई के दौरान पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अली की मई 2026 में एक कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी।

अधिकारियों को उसके शव की शिनाख्त करने में करीब एक महीने का समय लगा। अधिकारियों ने दावा किया कि वे अली के शव को सुरक्षित नहीं रख सके और इसलिए जून 2026 में उसे दफना दिया गया। इस खुलासे के बाद अली का परिवार क्वेटा के सिविल अस्पताल पहुंचा, जहां परिजनों ने अस्पताल के रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों के आधार पर शव की शिनाख्त की।

अली का शव कथित तौर पर छह अन्य शवों के साथ अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के कर्मचारियों या पुलिस ने इनमें से किसी भी शव के संबंध में कोई दस्तावेज तैयार नहीं किया और न ही उनकी सूचना दर्ज की। इन शवों को शिनाख्त किए बिना और उनके परिवारों को सूचित किए बिना दफना दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा, “बलूचिस्तान में इन मामलों को देखते हुए गंभीर आशंका है कि अन्य शव भी जबरन गायब किए गए लोगों के हो सकते हैं।” उन्होंने कहा, “इमरान अली को जबरन गायब किए जाने और हिरासत में उसकी मौत की त्वरित, गहन, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि जांच में अली की मौत के कारण, तरीके और परिस्थितियों का पता लगाया जाना चाहिए तथा जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए, ताकि उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

📡 स्रोत: NewsData.io

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हम सभी को याद रखना चाहिए कि हर जीवन अनमोल है और किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से सुलझाना चाहिए। जब किसी की सुरक्षा खतरे में हो, तो त्वरित और निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। समाज को न्याय के प्रति जागरूक बनाना चाहिए, ताकि अपराधों का सामना न केवल दण्ड के माध्यम से, बल्कि सहानुभूति और संवाद से भी किया जा सके। इस घटना से हमें यह सिखने को मिलता है कि मानवाधिकारों की रक्षा समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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