भोपाल

बंडा में जहरीली शराब से मौतों की न्यायिक जांच का आदेश जारी, रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में आयोग गठित

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बंडा में जहरीली शराब से मौतों की न्यायिक जांच का आदेश जारी, रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में आयोग गठित

तीन महीने में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा एक सदस्यीय आयोग, मौतों के कारणों के साथ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सागर/भोपाल, 23 सितंबर 2026। सागर जिले के बंडा तहसील क्षेत्र में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों और लोगों के बीमार होने के मामले की न्यायिक जांच के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विष्णु प्रताप सिंह चौहान को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग का मुख्यालय सागर में रहेगा और उसे तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर राज्य शासन को रिपोर्ट सौंपनी होगी।

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 12 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार आयोग को घटना के कारणों और परिस्थितियों की तथ्यात्मक जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि मादक पदार्थ के सेवन से हुई मौत और अस्वस्थता की घटनाओं के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

जांच के दायरे में संबंधित विभागों की भूमिका भी शामिल की गई है। आयोग बंडा क्षेत्र के आबकारी अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने निर्धारित दायित्वों के निर्वहन की स्थिति का परीक्षण करेगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना से संबंधित परिस्थितियों में संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों का पालन किस स्तर तक हुआ।

आयोग को भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी नियंत्रण और निगरानी के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। यानी जांच में घटना के कारणों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के परीक्षण के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों पर भी रिपोर्ट दी जाएगी।

सरकार ने जांच आयोग को राज्य जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत निर्धारित शक्तियां भी प्रदान की हैं। अधिसूचना के अनुसार आयोग को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से तीन माह के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत करनी होगी।

घटना के बाद सरकार की ओर से संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार मामले में कई आबकारी और पुलिस अधिकारियों पर निलंबन अथवा प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। वहीं 22 सितंबर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पेश जवाब में मामले से जुड़ी तीन एफआईआर में 52 आरोपियों को नामजद किए जाने और 32 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।

अब न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से घटना के कारणों, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बंडा में जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत और बीमारियों के मामले में मध्यप्रदेश सरकार ने एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया है। यह आयोग तीन महीनों में रिपोर्ट सौंपेगा और मौतों के कारणों के साथ अधिकारियों की भूमिका भी जाँचेगा। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सरकार को जवाबदेह ठहराने और ऐसे हादसों को रोकने के लिए नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ेगा। आम जनता पर इसका असर गहरा हो सकता है, क्योंकि यह शराब की सुरक्षा पर विश्वास बढ़ा सकता है और भविष्य में इसी तरह की त्रासदियों से बचाव

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।