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बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की मांग

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की मांग

30 अक्टूबर, नई दिल्ली: बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता, भीड़ की हिंसा और सांप्रदायिक भेदभाव के खिलाफ धार्मिक समुदायों, सांस्कृतिक संगठनों और धर्मनिरपेक्ष सोच वाले नागरिकों ने संयुक्त कार्रवाई का आह्वान किया है। ढाका के नेशनल प्रेस क्लब में 'बांग्लादेश ऑफ हार्मनी' शीर्षक से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने 10 सूत्रीय मांगें रखीं।

इन मांगों में निष्पक्ष जांच, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों की सुरक्षा, समान नागरिक अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, बाउल-फकीर और सूफी परंपराओं के संरक्षण, ऐतिहासिक दरगाहों की सुरक्षा और संपत्ति विवादों के समाधान की भी मांग की।

साथ ही, उर्स, मेलों, पूजा, संगीत कार्यक्रमों और खेल आयोजनों पर भेदभावपूर्ण या अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाने की अपील की। आयोजकों के मुताबिक, तीन से पांच नवंबर तक सभी 64 जिलों में उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। 13 नवंबर को मानव श्रृंखला और मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जबकि 20 नवंबर को ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार से मैमनसिंह तक लॉन्ग मार्च आयोजित किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य देश में सद्भाव, समान अधिकार और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना है।

फाइल फोटो

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।