बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर अवामी लीग ने उठाए सवाल, दुर्गा पूजा से पहले डर का माहौल होने का दावा
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बांग्लादेश की अवामी लीग ने गुरुवार को देशभर में रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई.
पार्टी ने सवाल उठाया कि जब एक पूरे हिंदू परिवार की हत्या हो सकती है और डेढ़ महीने बाद भी मामले में स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, तो अल्पसंख्यकों की जिंदगी की क्या कीमत रह जाती है.
पार्टी ने कहा कि ऐसे भय और असुरक्षा के माहौल में लोगों से कहा जा रहा है कि दुर्गा पूजा मनाई जाएगी, जबकि बांग्लादेश के मंदिरों में सजावट तक नहीं हो रही है.
अवामी लीग के अनुसार, बच्चों ने नए कपड़े तक नहीं खरीदे हैं। पार्टी ने एक बुजुर्ग महिला के हवाले से कहा, "भगवान ही जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है." पार्टी ने कहा कि ऐसे माहौल में उत्सव की बात करना लोगों को भरोसा नहीं देता, बल्कि यह शर्म की बात है.
अवामी लीग ने अगस्त में रंगपुर शहर में सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस के अनुसार यह मामला अब तक लगभग सुलझ जाना चाहिए था.
पार्टी ने कहा, "लेकिन अब तक डीएनए जांच की रिपोर्ट नहीं आई है और घटनास्थल से जुटाए गए 35 अलग-अलग साक्ष्यों में से किसी की भी रिपोर्ट नहीं मिली है. वहीं, इलाके के लोग पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं.
पीड़ित परिवार के रिश्तेदार भी इस बात को नहीं मानते कि केवल दो लोग परिवार के चार सदस्यों की एक-एक करके गला घोंटकर हत्या कर सकते थे." अवामी लीग ने सत्तारूढ़ बीएनपी सरकार और विपक्षी जमात-ए-इस्लामी को निशाने पर लेते हुए जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि अगर मामला सुलझ गया है तो लोग अब भी डरे हुए क्यों हैं, और अगर मामला नहीं सुलझा है तो डेढ़ महीने बाद भी प्रयोगशाला की एक भी रिपोर्ट क्यों नहीं आई.
पार्टी ने कहा कि जिस घर में हत्याएं हुई थीं वहां अब पुलिस तैनात है और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है. इसके बावजूद जिला प्रशासन का कहना है कि सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा चुके हैं.
अवामी लीग के मुताबिक, एक स्थानीय हिंदू गृहिणी ने कहा कि उन्हें प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा नहीं है.
वहीं, एक स्थानीय निवासी ने कहा कि शुरुआत में इलाके में पुलिस और मीडिया की लगातार मौजूदगी थी, लेकिन अब सब चुप हो गए हैं और यही खामोशी सबसे बड़े सवाल खड़े करती है.
पिछले सप्ताह अवामी लीग ने दावा किया था कि पिछले छह महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय के 44 लोगों की मौत, मंदिरों और घरों पर हमले, सैकड़ों कथित मानवाधिकार उल्लंघन और रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या जैसी घटनाओं ने अल्पसंख्यकों के बीच भय को और बढ़ा दिया है.
पार्टी ने कहा, "प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के लिए समानता के वादों की असली परीक्षा यह है कि कमजोर और संवेदनशील नागरिकों के साथ जमीन पर क्या हो रहा है.
बांग्लादेश के धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक 2026 में भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताओं के साथ प्रवेश कर चुके हैं। सरकार बदलने से उनकी आशंकाएं खत्म नहीं हुई हैं." बता दें कि बांग्लादेश में पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान भी अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, पर हमलों की घटनाएं सामने आती रही थीं.
अवामी लीग का आरोप है कि यह स्थिति मौजूदा बीएनपी सरकार के कार्यकाल में भी जारी है. Input: IANS
📡 स्रोत: NewsData.io