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बांग्लादेश को पानी देने पर लालू-संजय झा भिड़े:कौन सही, कौन झूठा, JDU गंगा का पानी क्यों नहीं बांटना चाहती, अब क्या करेंगे मोदी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बांग्लादेश को पानी देने पर लालू-संजय झा भिड़े:कौन सही, कौन झूठा, JDU गंगा का पानी क्यों नहीं बांटना चाहती, अब क्या करेंगे मोदी

'जब 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार ने बांग्लादेश के साथ गंगा के पानी के बंटवारे का समझौता किया था, तब लालू यादव केंद्र में प्रभावशाली नेता थे।

अगर बिहार सरकार ने इसका मजबूती से विरोध किया होता तो राज्य को बाढ़ और सूखे का सामना नहीं करना पड़ता।' 20 अगस्त को JDU नेता और राज्यसभा सांसद संजय झा ने अखबारों में लेख लिखकर और इंटरव्यू देकर लालू यादव पर निशाना साधा। इस पर RJD सुप्रीमो लालू यादव ने इशारों-इशारों में उन्हें नौसिखिया बताया।

लालू यादव सच बोल रहे या संजय झा, JDU क्यों संधि खत्म कराना चाहती है, अगर मोदी ने मांग नहीं मानी तब क्या होगा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: संजय झा का लालू यादव पर किया गया दावा क्या सच है? जवाब: इससे समझने के लिए आपको 30 साल पीछे चलना होगा। 12 दिसंबर 1996। दिल्ली के आसमान में कोहरा छाया था और कड़ाके की सर्दी थी।

हालांकि, राजनीतिक गर्मी बढ़ी हुई थी। बांग्लादेश की नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शेख हसीना दिल्ली दौरे पर थीं। दोनों प्रधानमंत्रियों एचडी देवगौड़ा और शेख हसीना ने एक संधि पर हस्ताक्षर किया, जिसका नाम था भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि। उस वक्त इंद्रकुमार गुजराल भारत के विदेश मंत्री थे।

लालू की मौन सहमति, मंत्री ने जताया था विरोध हालांकि… बिहार सरकार ने इस संधि का उस वक्त विरोध किया था। तब के सिचांई मंत्री जगदानंद सिंह ने भारत सरकार को पत्र लिखकर विरोध जताया था।

लालू ने शेयर किया 2011 का वीडियो 22 अगस्त की शाम लालू यादव ने X पर लिखा- ’फरक्का बैराज पर JDU के ऐसे नौसिखिए बोल रहे हैं, जिन्हें इस मुद्दे का कोई इतिहास-भूगोल मालूम नहीं है।

JDU के नौसिखियों को ज्ञानार्जन के लिए RJD शासन के सिंचाई मंत्री जगदा भाई (जगदानंद सिंह) के केंद्र सरकार के साथ पत्राचार को पढ़ना चाहिए।' सवाल-2: JDU गंगा जल संधि को क्यों खत्म कराना चाहती है? जवाबः इसके 2 बड़े कारण हो सकते हैं… 1.

नीतीश के एजेंडे को आगे बढ़ाने का मैसेज नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री नहीं है, लेकिन उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हो चुकी है। पार्टी हर मौके पर अपने को नीतीश कुमार के पद चिह्नों पर आगे बढ़ने की बात कहती है।

बांग्लादेश गंगा जल संधि की समीक्षा करने और फरक्का बैराज को तोड़ने की डिमांड नीतीश कुमार बीते करीब 2 दशकों से करते रहे हैं। इसी साल दिसंबर में संधि की समय-सीमा खत

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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