एक और बांकीपुर! वो मुद्दा जो BJP के लिए बन सकता है परेशानी का सबब

देश में 'आरक्षण' का मुद्दा एक बार फिर रंग लेता दिख रहा है. नेशनल लेवल पर अभी तो ये बहुत छोटा है, लेकिन कहा जा रहा है कि अगर यह Gen-Z मूवमेंट की तरह बड़ा हो गया, तो कहीं बीजेपी के लिए और भी जगहों पर बांकीपुर जैसी स्थिति बन सकती है.
ये मुद्दा देश में जाति आरक्षण हटाकर आर्थिक आरक्षण लागू करने वाली मांग की है. 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आरक्षण हटाओ आंदोलन को लेकर सड़क पर वैसा रिस्पांस तो अभी नहीं है जैसा पेपरलीक को लेकर जेन-जी या CJP को मिला था, लेकिन सोशल मीडिया पर माहौल बनता जा रहा है इसीलिये खासतौर पर बीजेपी की बेचैनी बढ़ी हुई है क्योंकि वो देश और कई राज्यों की सत्ता में है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन बिहार के नवादा में कुछ लोगों ने अपने घरों से बीजेपी के झंडे उतार लिये और उन्हें टीवी कैमरों के सामने डस्टबिन में डाल दिये.
ऐसा करके इन्होंने बीजेपी को मैसेज दिया कि अगर अपने परंपरागत अपर कास्ट वोटर को उसने ताक पर रखा, तो अगड़ा समाज आगे फिर वही करेगा जो बांकीपुर में किया. पांच दिनों में आरक्षण हटाओ के नाम पर देश में कई प्रदर्शन हो चुके हैं.
इसमें मुख्य मांग है कि आरक्षण का आधार बदला जाए. उसे जाति की बजाए आर्थिक आधार पर दिया जाए, क्योंकि गरीब तो सवर्ण भी हैं. इनमें से कुछ प्रदर्शनों में UGC और SC/ST एक्ट के रिव्यू की मांग भी उठी, लेकिन इनमें बड़ा प्रदर्शन 21 अगस्त का ही था जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ, जिसमें 5 हजार लोग थे.
आंदोलनकारी दिखा रहे बांकीपुर का डर चूंकि आरक्षण का सारी मांगें केंद्र सरकार से है और लोगों के बयानों में जो गुस्सा है, वो सीधे बीजेपी पर है. इन्हीं प्रदर्शनों में कई बार बीजेपी को बांकीपुर की चेतावनी दी गई.
आखिर अगड़े आंदोलनकारी बार-बार बीजेपी को बांकीपुर का डर ही क्यों दिखा रहे हैं. 3 अगस्त को बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे आए जिसमें बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की छोड़ी हुई इस सीट पर 30 साल से बीजेपी को कोई हरा नहीं पाया था, लेकिन प्रशांत किशोर ने बीजेपी को उसी के
📡 स्रोत: ABP Live