इस बार जनगणना पहले की तुलना में होगी कहीं अधिक व्यापक
अगस्त 20, शिमला (हिमाचल प्रदेश): जनगणना-2027 को लेकर प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की है। इसमें जनगणना के दौरान जुटाई जाने वाली जानकारी और प्रश्नावली का विस्तृत जारी किया गया है। इसके तहत इस बार जनगणना पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होगी।
व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी के साथ उसकी शिक्षा, रोजगार, आर्थिक गतिविधि, प्रवास, दिव्यांगता, आवासीय स्थिति और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इस बार करीब 40 सवाल पूछे जाएंगे। सबसे अहम बदलाव यह है कि जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे।
इसके अलावा लोगों से उनके रोजगार, काम के प्रकार, काम की तलाश, कार्यस्थल तक आने-जाने, स्थायी निवास और प्रवास से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे। जनगणना-2027 देश की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। इस बार डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया को भी आधुनिक बनाया जा रहा है।
इसके लिए मोबाइल आधारित एप्लीकेशन और डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करने के साथ उसके प्रबंधन और निगरानी को भी ऑनलाइन किया जा सकेगा। हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां बर्फबारी और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनसंख्या गणना का कार्यक्रम अन्य राज्यों से अलग रखा गया है।
उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में की जानी है। अधिसूचना में शामिल प्रश्नावली में व्यक्ति का नाम, परिवार से संबंध, लिंग, जन्मतिथि एवं आयु, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय आयु, पति या पत्नी का नाम, शैक्षणिक योग्यता और धर्म जैसी जानकारियां शामिल हैं।
इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और जाति से संबंधित विवरण भी दर्ज किया जाएगा। मातृभाषा तथा अन्य भाषाओं के ज्ञान और उनके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। जनगणना में केवल यह जानना पर्याप्त नहीं होगा कि व्यक्ति नौकरी करता है या नहीं।
उससे उसकी आर्थिक गतिविधि और रोजगार की प्रकृति के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। कर्मचारी वर्ग, रोजगारध्व्यवसाय, स्वरोजगार, काम की तलाश और काम के लिए दूसरे स्थान पर जाने जैसी स्थितियों को भी रिकॉर्ड किया जाएगा। जनगणना में व्यक्ति के वर्तमान और स्थायी निवास से संबंधित जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।
कब और कहां से प्रवास किया, प्रवास का कारण क्या रहा तथा स्थायी निवास स्थान कहां हैकृइस तरह की जानकारियां दर्ज होने से देश और प्रदेश में लोगों के आवागमन की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। प्रश्नावली में दिव्यांगता से संबंधित जानकारी भी शामिल है।
इससे दिव्यांग आबादी की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। इसी तरह पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी कई सूचनाएं एक ही जनगणना प्रक्रिया में दर्ज होंगी। जनगणना के व्यापक स्वरूप को देखते हुए इस बार केवल आबादी की गिनती पर जोर नहीं है।
मकान, परिवार, व्यक्ति, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और सामाजिक स्थिति, इन सभी पहलुओं को जोड़कर देश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर तैयार करने की कोशिश की जा रही है। जनगणना में जुटाई जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी के इस्तेमाल को लेकर गोपनीयता का प्रावधान है।
अधिकारियों द्वारा जुटाए गए आंकड़ों का उद्देश्य समग्र सांख्यिकीय तस्वीर तैयार करना है, ताकि सरकार को योजनाओं और नीतियों के लिए विश्वसनीय आधार उपलब्ध हो सके। जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में शुरू होगी।