बरेली के मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन भक्त उमड़े:मां शैलपुत्री का पूजन किया; चुनरी ओढ़ाई, फल और देशी घी का भोग लगाया
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →रविवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। सुबह घरों से लेकर देवी मंदिरों तक कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना होगी। कालीबाड़ी के मां काली देवी मंदिर, साहूकारा के नवदुर्गा शक्ति मंदिर, नेकपुर के ललिता देवी मंदिर और सुभाष नगर के चौरासी घंटा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। नौ दिनों तक व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती के साथ देवी के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी के संयोग पर कन्या पूजन व हवन होंगे, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। सुबह 6:10 से 6:44 बजे तक कलश स्थापना नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई कर कलश स्थापना करेंगे।
रविवार सुबह 6:10 से 6:44 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:35 से दोपहर 12:22 बजे तक बताया गया है। कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, जल, कलश, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, रोली, अक्षत, लाल कपड़ा, फूल, धूप, दीप और मिठाई की व्यवस्था करें। पूजा स्थल पर मिट्टी में जौ बोएं।
कलश में जल भरकर पान, सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। उसके मुख पर आम के पत्ते रखकर, एक कटोरी में चावल भरकर हरा नारियल स्थापित करें। इसके बाद मां दुर्गा का आह्वान कर पूजा और आरती करें। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना होगी।
श्रद्धालु मां को फूल, चुनरी, फल और मिठाई अर्पित करेंगे। नौ दिनों तक श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत, पूजा-पाठ और आरती करेंगे। नौ दिन, नौ देवियां; जानें किस दिन किसकी पूजा 11 अक्टूबर, रविवार — मां शैलपुत्री: सफेद फूल, चुनरी, फल और देशी घी का भोग लगाए। 12 अक्टूबर, सोमवार — मां ब्रह्मचारिणी: शक्कर, मिश्री, सफेद फूल और फल अर्पित किए जाते हैं।
13 अक्टूबर, मंगलवार — मां चंद्रघंटा: लाल या पीले फूल, केला और मिठाई चढ़ाई जा सकती है। 14 अक्टूबर, बुधवार — मां कूष्मांडा: पीले फूल, मालपुआ और मौसमी फल अर्पित करने की परंपरा है। 15 अक्टूबर, गुरुवार — मां स्कंदमाता: केला, खीर, पीले फूल और मिठाई चढ़ाई जा सकती है। 16 अक्टूबर, शुक्रवार — मां कात्यायनी: लाल फूल, शहद, फल और मिठाई अर्पित की जाती है।
17 अक्टूबर, शनिवार — मां कालरात्रि: गुड़, गुड़ से बनी मिठाई और लाल फूल चढ़ाने की परंपरा है। 18 अक्टूबर, रविवार — सप्तमी का पूजन: तिथि के अनुसार मां की पूजा होगी। 19 अक्टूबर, सोमवार — महाअष्टमी और महानवमी: मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन, हवन और व्रत का पारण करेंगे।
अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन, होगा हवन नवरात्र में अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। कुछ परिवार अष्टमी पर तो कुछ नवमी पर कन्या पूजन करते हैं। इस बार उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों तिथियों का संयोग 19 अक्टूबर को बताया गया है। कन्या पूजन में छोटी बच्चियों के पैर धोकर तिलक लगाया जाता है।
इसके बाद हलवा, चना और पूड़ी का प्रसाद खिलाकर दक्षिणा या उपहार दिया जाता है। हवन में हवन कुंड, समिधा, घी और हवन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां देने के बाद पूर्णाहुति, आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। बरेली के इन मंदिरों में पहुंचेंगे श्रद्धालु कालीबाड़ी का मां काली देवी मंदिर: शहर के पुराने धार्मिक स्थलों में शामिल इस मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष पूजा, फूलों से सजावट और सुबह-शाम आरती होती है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर करीब 250 साल पुराना है। व्रत में इन बातों का रखें ध्यान नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालु पहले दिन पूजा और कलश स्थापना के बाद फलाहार कर सकते हैं। पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखें और सुबह-शाम आरती करें। अखंड ज्योति जलाने पर उसकी सुरक्षित व्यवस्था करें और उसे बिना निगरानी के न छोड़ें।
20 अक्टूबर को मनेगा दशहरा नवरात्र के बाद मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा की पूजा, शस्त्र पूजन और रावण दहन की परंपरा है। बरेली में रामलीला आयोजनों और दशहरा मेलों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी।
📡 स्रोत: NewsData.io