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बर्फीली चोटियों से समंदर तक, जवानों के नाम रही पीएम मोदी की दिवाली

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बर्फीली चोटियों से समंदर तक, जवानों के नाम रही पीएम मोदी की दिवाली

नवंबर 08, नई दिल्ली: सरहदों पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परंपरा लगातार 12 वर्षों से जारी है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सियाचिन से शुरू हुआ यह सिलसिला इस बार छत्तीसगढ़ के बस्तर तक पहुंचा। प्रधानमंत्री हर साल दिवाली के मौके पर देश के अलग-अलग सीमावर्ती और सैन्य क्षेत्रों में पहुंचकर जवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करते रहे हैं।

वर्ष 2015 में उन्होंने पंजाब, 2016 में सुमदो, 2017 में गुरेज और 2018 में हर्षिल में जवानों के साथ दिवाली मनाई। इसके बाद 2019 में राजौरी, 2020 में लोंगेवाला और 2021 में नौशेरा पहुंचकर सैनिकों का उत्साह बढ़ाया। वहीं, वर्ष 2022 में कारगिल, 2023 में लेप्चा और 2024 में कच्छ में जवानों के बीच दिवाली मनाई। वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रांत पर नौसैनिकों के साथ दीपावली का पर्व मनाया।

बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर तपते रेगिस्तान और समुद्र के बीच तक प्रधानमंत्री की यह परंपरा जारी रही है। हर साल दिवाली के मौके पर जवानों के बीच पहुंचकर प्रधानमंत्री उनके समर्पण, साहस और देश सेवा के प्रति सम्मान व्यक्त करते रहे हैं।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सीमा पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने की 12वीं वर्षगांठ को दर्शाती है, जो 2014 में सियाचिन से शुरू हुई थी। यह परंपरा हर साल सीमा और सैन्य क्षेत्रों में जाकर सैनिकों के साथ त्योहार मनाने की है, जिससे उनकी मनोबल बढ़ती है। इस पहल की महत्ता इस बात में है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के प्रति सरकार की सतत सराहना और सम्मान को दिखाती है, जिससे सैनिकों को प्रेरणा मिलती है। आम जनता पर इसका असर मनोबल और देशभक्ति की भावना को बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता की भाव

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।