बसपा के महासम्मेलन से अस्मिता ने दिखाई ताकत:आधिकारिक प्रत्याशी बनीं; कठिन होगी चिल्लूपार की लड़ाई
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की चर्चित चेहरा अस्मिता चंद ने सोमवार को अपनी ताकत दिखाई। मौका था बसपा के कार्यकर्ता महासम्मेलन का। इस महासम्मेलन में बसपा प्रमुख मायावती का संदेश सबतक पहुंचाया गया।
भारी भीड़ के बीच अस्मिता को यहां से बसपा का प्रभारी व प्रत्याशी घोषित किया गया। 2027 के चुनाव के लिए अस्मिता अब 'हाथी' निशान के साथ अपना प्रचार अभियान शुरू करेंगी। बसपा कई बार यहां गेम चेंजर बनकर उभरी है। यही उम्मीद अस्मिता को भी है।
भाजपा से पिछले कई चुनावों से दावेदारी करने वाली अस्मिता चंद को टिकट नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने एक साल पहले ही यह तय कर लिया था कि 2027 का विधानसभा चुनाव जरूर लड़ेंगी। तभी से बसपा में उनके जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कुछ दिन पहले उन्होंने अपना रास्ता बदल भी लिया।
फील्ड में लगातार सक्रिय रहने वाली अस्मिता ने अचानक एक दिन अपने बैठके का स्वरूप बदल दिया। वहां बसपा के संस्थापक कांशीराम व बसपा प्रमुख मायावती के चित्र टंग गए। सोशल मीडिया पेज से भाजपा का हर चिह्न गायब हो गया। महासम्मेलन की सफलता के लिए दिन-रात एक किया बसपा का कार्यकर्ता महासम्मेलन गोला के बीएसएवी इंटर कालेज में हुआ।
यह सम्मेलन स्थल कार्यकर्ताओं से भर गया। यहां लगभग 5000 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें से अधिकतर चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से थे। मुख्य मंडल प्रभारी मदन राम एवं इंदू चौधरी मंच पर उपस्थित रहे। उन्होंने अस्मिता चंद को प्रभारी व प्रत्याशी बनाने की घोषणा की।
अस्मिता के पार्टी में आने से बसपा कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा चिल्लूपार बसपा के लिए काफी अनुकूल विधानसभा क्षेत्र माना जाता है। बसपा कार्यकर्ता भी यहां किसी नामी और मजबूत प्रत्याशी की तलाश में थे। जैसे ही अस्मिता ने बसपा का झंडा आधिकारिक रूप से स्वीकार किया, यहां के कार्यकर्ताओं में भी उत्साह का संचार हो गया।
अस्मिता से मिलकर बधाई देने के लिए बसपा कार्यकर्ताओं की लाइन लगी रही। सोशल मीडिया पर भी चिल्लूपार के बसपा कार्यकर्ताओं ने घूब प्रचार किया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्मिता के आने से कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा है।
वियज रथ रोकने के लिए पहचानी जाती है बसपा बसपा, चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में विजय रथ रोकने के लिए पहचानी जाती है। जब वहां पूर्व कैबिनेट मंत्री पं. हरिशंकर तिवारी अजेय माने जा रहे थे। उनके सामने कोई मजबूत कैंडिडेट नजर नहीं आता था तो उस समय बसपा ने उनका विजय रथ रोका था।
बसपा ने वहां एक सामाजिक कार्यकर्ता राजेश त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया और राजेश 2007 का चुनाव जीत गए। इसके बाद 2012 में भी वह इसी पार्टी से विधायक बने। लेकिन 2017 में जब वह भाजपा के साथ गए तो बसपा ने यहां से हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी को प्रत्याशी बनाया।
यह वह दौर था जब राजेश त्रिपाठी विजय रथ पर सवार हैट्रिक लगाने की तैयारी में थे। बसपा के टिकट पर विनय शंकर ने उनका विजय रथ रोक दिया। 2022 में भाजपा से राजेश त्रिपाठी फिर विधायक बने। इस चुनाव में विनय शंकर तिवारी सपा से प्रत्याशी थे। बसपा के प्रत्याशी का नाम पहले से चर्चित नहीं था।
इस बार एक बार फिर बसपा को ऐसा प्रत्याशी मिल गया है, जिसकी क्षेत्र में पहचान है और पिछले कई सालों से जो अनवरत चल रही हैं। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत माना जाता है।
📡 स्रोत: NewsData.io