बस्तर में बारिश थमी, लेकिन नदियां उफान पर, प्रशासन अलर्ट
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बस्तर, 27 सितंबर 2026
बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से बस्तर अंचल में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश पर भले ही विराम लग गया है, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार बड़ी मात्रा में पानी की आवक के कारण इंद्रावती सहित अंचल की प्रमुख नदियां और नाले उफान पर हैं। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं जलभराव वाले क्षेत्रों में संभावित विद्युत दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई इलाकों में एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है।
इंद्रावती नदी का जलस्तर शनिवार रात 8 बजे तक 12.56 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है, जो खतरे के निशान से करीब 4.26 मीटर अधिक हो सकता है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय और निचले रिहायशी क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन ने मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर-एसपी लगातार दूसरे दिन पहुंचे प्रभावित क्षेत्रों में
बाढ़ के हालात के बीच कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने लगातार दूसरे दिन प्रभावित क्षेत्रों का सघन भ्रमण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने डोंगाघाट और आसना सहित जलभराव से प्रभावित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया। मार्गों पर जलभराव और आवागमन में अवरोध के बावजूद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की प्रत्यक्ष जानकारी ली और राहत कार्यों की समीक्षा की।
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने पनारापारा स्थित राहत शिविर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में ठहरने, भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली। संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आवश्यक सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराई जाएं।
कलेक्टर श्री छिकारा ने मैदानी अमले और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के साथ निचले एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं। राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखते हुए जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने तथा प्रभावित परिवारों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने कहा गया है। पुलिस और प्रशासनिक अमला भी चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
प्रशासन ने नागरिकों से बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार नहीं करने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों के पास नहीं जाने को कहा गया है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों से आपदा नियंत्रण कंट्रोल रूम अथवा संबंधित क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों को तत्काल सूचना देने का आग्रह किया गया है।
बारिश थमने के बावजूद नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन, पुलिस, राहत-बचाव दल और विद्युत वितरण कंपनी का अमला प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय है। राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ संवेदनशील इलाकों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
बस्तर की बाढ़ की चेतावनी हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के प्रति हमारा रवैया ही हमारी सुरक्षा तय करता है। जब जल स्तर बढ़ता है, तो समय रहते निकासी योजनाएँ बनाना, सामुदायिक चेतावनी प्रणालियाँ चलाना और आपातकालीन संसाधन साझा करना ज़रूरी है। हमें आपसी सहयोग से नदियों के तटों को मजबूत करना चाहिए, ताकि बाढ़ के समय भी जीवन सुरक्षित रहे। इस आपदा में प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति और सहायता का संदेश समाज को एकजुट करने की शक्ति रखता है।