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बेंगलुरु में कैंसर के मरीज़ों की जान के साथ खिलवाड़! 90 से ज्यादा अस्पतालों तक पहुंची कैंसर की नकली दवाएं, कृपा हेल्थकेयर का मालिक गिरफ्तार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
बेंगलुरु में कैंसर के मरीज़ों की जान के साथ खिलवाड़! 90 से ज्यादा अस्पतालों तक पहुंची कैंसर की नकली दवाएं, कृपा हेल्थकेयर का मालिक गिरफ्तार

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में नकली और री-पैकेज की गई दवाओं के एक बड़े संदिग्ध रैकेट का खुलासा हुआ है। बेंगलुरु पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की संयुक्त जांच में सामने आया है कि कैंसर समेत गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली संदिग्ध दवाएं शहर के 90 से ज्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुंचाई गई हो सकती हैं।

जांच के दौरान मिनर्वा सर्कल के पास स्थित कृपा हेल्थकेयर पर छापेमारी की गई। पुलिस ने फार्मेसी संचालक वीरेश कुमार जैन को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि कृपा हेल्थकेयर का इस्तेमाल कथित तौर पर संदिग्ध दवाओं के स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के रूप में किया जा रहा था।

50 फीसदी तक डिस्काउंट देकर अस्पतालों तक पहुंचाई दवाएं

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क में कैंसर की दवाओं के अलावा जीवन रक्षक दवाएं और ICU में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन भी शामिल होने का संदेह है। कथित तौर पर इन दवाओं को बाजार कीमत से करीब 50 फीसदी तक कम कीमत पर अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर्स को उपलब्ध कराया जाता था।

पुलिस को आशंका है कि बेहद कम कीमत वाली दवाओं को अलग-अलग नामों से रीब्रांड किया जाता था। इसके अलावा कुछ एक्सपायर्ड दवाओं को नए कंटेनरों में पैक कर प्रतिष्ठित फार्मा कंपनियों जैसे दिखने वाले कथित फर्जी लेबल लगाकर बाजार में उतारे जाने की भी जांच की जा रही है।

₹5 करोड़ की संदिग्ध नकली दवाओं से खुला मामला

मामले की जांच की शुरुआत 18 अगस्त को बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी और डोड्डेरी इलाके में एक फार्महाउस पर छापेमारी से हुई थी। अधिकारियों ने वहां करीब ₹5 करोड़ मूल्य की संदिग्ध नकली दवाएं, फर्जी बिल, इंजेक्शन भरने से संबंधित उपकरण और कथित नकली फार्मास्युटिकल लेबल बरामद किए थे।

इसके बाद SIT ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए कर्नाटक के अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 10 से ज्यादा ठिकानों पर तलाशी ली। इसी जांच के दौरान कथित सप्लाई चेन का संबंध कृपा हेल्थकेयर और उसके मालिक वीरेश कुमार जैन तक पहुंचा।

15 से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव भी जांच के दायरे में

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित नेटवर्क में 15 से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की क्या भूमिका थी। जांच एजेंसियां अस्पतालों और क्लीनिकों तक दवाओं की सप्लाई का पूरा नेटवर्क खंगाल रही हैं।

पुलिस बैंक लेनदेन, खरीद-बिक्री के वाउचर और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संदिग्ध दवाएं कहां से खरीदी गईं, किन संस्थानों तक पहुंचीं और इस पूरे नेटवर्क में पैसों का लेनदेन कैसे हुआ।

कथित मास्टरमाइंड की तलाश

जांचकर्ताओं के अनुसार वीरेश कुमार पिछले करीब पांच वर्षों से यह कारोबार चला रहा था। पुलिस ने प्रशांत नाम के एक व्यक्ति को कथित तौर पर नेटवर्क का प्रमुख आरोपी या मास्टरमाइंड बताया है। वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। वीरेश कुमार इस मामले में अब तक गिरफ्तार प्रमुख आरोपी है।

दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए

कृपा हेल्थकेयर से बरामद दवाओं के सैंपल की जांच की जा रही है। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि बरामद दवाएं वास्तव में नकली थीं, री-पैकेज की गई थीं या उनमें किसी तरह की मिलावट थी। साथ ही संबंधित बैच नंबरों और सप्लाई रिकॉर्ड की जांच कर उन अस्पतालों और क्लीनिकों की पहचान की जा रही है जहां ये दवाएं पहुंची हो सकती हैं।

पुलिस के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है और कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पूरा दायरा सामने आना बाकी है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

बेंगलुरु में कैंसर रोगियों को नकली दवाओं की आपूर्ति का एक बड़ा रैकेट उजागर हुआ है, जिसमें 90 से अधिक अस्पताल और क्लीनिक प्रभावित हुए हैं। यह घटना दवा सुरक्षा और नियामक निगरानी में गंभीर कमियों को दर्शाती है। ऐसी धोखाधड़ी से रोगियों की जान खतरे में पड़ती है और चिकित्सा प्रणाली पर विश्वास घटता है। जनता को सतर्क रहना चाहिए, विश्वसनीय स्रोतों से दवाएं खरीदनी चाहिए और किसी भी असामान्य दवा की रिपोर्ट तुरंत स्वास्थ्य प्राधिकरणों को करनी चाहिए।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

नकली दवाओं का खतरा हमें यह सिखाता है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सत्यापन अनिवार्य है। रोगियों को विश्वसनीय स्रोतों से ही दवा खरीदनी चाहिए, और चिकित्सकीय सलाह का कड़ाई से पालन करना चाहिए। यदि किसी संदिग्ध दवा का सामना हो तो तुरंत प्राधिकरण को सूचित करें। समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देकर हम ऐसे अपराधों को रोक सकते हैं और रोगियों की रक्षा कर सकते हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।