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भादौ की दूसरी सवारी में 6 घंटे दर्शन देंगे महाकाल:15 किलो की ड्रेस-आभूषण पहनकर चलेगी 'राजसी' टोली; ड्रोन से बरसेंगे 50 क्विंटल फूल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 14 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भादौ की दूसरी सवारी में 6 घंटे दर्शन देंगे महाकाल:15 किलो की ड्रेस-आभूषण पहनकर चलेगी 'राजसी' टोली; ड्रोन से बरसेंगे 50 क्विंटल फूल

भादौ के दूसरे सोमवार पर आज उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकाली जाएगी। इसका मार्ग करीब साढ़े पांच किलोमीटर का होगा। सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु आएंगे। इससे पहले सावन की चार और भादौ की एक सवारी निकल चुकी है। ये छठी और आखिरी सवारी है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादत्य सिंधिया पालकी का पूजन करेंगे।

महाकाल की सवारी में 5 कलाकारों की एक ऐसी टोली भी शामिल होती है, जिनकी वेशभूषा और अंदाज श्रद्धालुओं का ध्यान खुद-ब-खुद खींच लेता है। खास तरह की पगड़ी, आभूषण और पारंपरिक हथियार वाले इस रूप में तैयार होने के लिए करीब दो घंटे तक मेकअप किया जाता है। इसके बाद 11 से 15 किलो तक की राजसी पोशाक पहनकर ये किरदार पूरी सवारी में पैदल चलते हैं।

शिक्षक ने शुरू की परंपरा, 39 साल से निभा रहे किरदार महाकाल की सवारी में शामिल होने वाली इस टोली में स्वामी मुस्कुराके, स्वामी खिलखिलाके, स्वामी दिलमिलाके, स्वामी गुदगुदाके और पप्पू तलवार शामिल हैं। बाबा की पालकी के आगे चलने वाली यह टोली अलग-अलग राजसी किरदारों में नजर आती है। हर साल इनका लुक अलग होता है।

इस टोली के मुखिया शैलेंद्र व्यास उर्फ ‘स्वामी मुस्कुराके’ 39 साल से लगातार महाकाल की सवारी में शामिल हो रहे हैं। वे उज्जैन के ही रहने वाले हैं। 1989 में शिक्षक की नौकरी के दौरान उन्हें पता चला कि पुराने समय में राजा अपनी राजसी वेशभूषा में महाकाल की सवारी में शामिल होते थे। इसी परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने पहली बार धोती-कुर्ता और साफा पहनकर सवारी में हिस्सा लिया।

इसके बाद यह सिलसिला कभी नहीं टूटा। देखिए, 3 तस्वीरें… 15 किलो की ड्रेस पहनकर चलते हैं रिटायर्ड बैंक अधिकारी दिनेश रावल उर्फ स्वामी दिलमिलाके पिछले 30 वर्ष से इस टोली का हिस्सा हैं। पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड रावल के पास भी 65 से ज्यादा राजसी ड्रेस हैं। करीब 7 लाख रुपए की इन पोशाकों को उन्होंने संभालकर रखा है।

वे बताते हैं कि सवारी में शामिल होने के लिए सिर्फ पोशाक पहनना ही काफी नहीं होता। पहले मेकअप, फिर 15 किलोग्राम तक की भारी पोशाक और आभूषण पहनकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। हालांकि, बाबा महाकाल की आस्था के कारण थकान महसूस नहीं होती। कपड़ा व्यापारी 38 साल से राजसी रूप में शामिल हो रहे मनोहर गुप्ता यानी स्वामी खिलखिलाके भी 38 साल से इस टोली के सदस्य हैं।

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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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