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भागदौड़ से थक गए हैं तो पेड़ों की छांव में बिताएं वक्त, तनाव घटाएगी फॉरेस्ट थेरेपी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

भागदौड़ से थक गए हैं तो पेड़ों की छांव में बिताएं वक्त, तनाव घटाएगी फॉरेस्ट थेरेपी नीम, पीपल, आंवला और बरगद जैसे पेड़ों के बीच कुछ समय बिताने से मन को मिलता है सुकून, गांधी बाग और संजय वन बन सकते हैं प्राकृतिक थेरेपी के केंद्र मेरठ। भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव और लगातार बढ़ता तनाव लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।

ऐसे में राहत के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। शहर के गांधी बाग और संजय वन जैसे हरित क्षेत्र प्रकृति के करीब जाकर तनाव कम करने का सहज माध्यम बन सकते हैं। वन विभाग की प्रशिक्षण एवं शोध विंग के अधिकारियों के अनुसार, पेड़ों के बीच शांत वातावरण में कुछ समय बिताना मानसिक सुकून देने के साथ तनाव कम करने में सहायक हो सकता है।

गांधी बाग और संजय वन में नीम, बरगद, पीपल, अशोक, आंवला, अर्जुन और सहजन जैसे पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन पेड़ों के बीच टहलना, हरियाली को निहारना और पक्षियों की आवाज सुनना मन को शांति देता है। शांत वातावरण में गहरी और सामान्य गति से सांस लेना भी तनाव कम करने में मददगार हो सकता है।

प्रकृति के बीच चलना भी बन सकता है थेरेपी वन विभाग की प्रशिक्षण एवं शोध विंग के प्रभारी संजय कुमार सिंह के अनुसार, फॉरेस्ट थेरेपी के लिए किसी विशेष गतिविधि की आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति कुछ देर धीरे-धीरे पेड़ों के बीच टहल सकता है, पक्षियों की आवाज सुन सकता है और प्रकृति को महसूस कर सकता है।

इससे रोजमर्रा की आपाधापी से अलग मानसिक शांति का अनुभव होता है। प्रभागीय निदेशक वानिकी वंदना फोगाट का कहना है कि वन क्षेत्र सिर्फ वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं। शहरों में मौजूद हरित क्षेत्र लोगों को प्रकृति के करीब आने और मानसिक सुकून पाने का अवसर भी देते हैं। जापान की फॉरेस्ट थेरेपी पर हुए अध्ययन प्रशिक्षण एवं शोध विंग के प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि जापान में फॉरेस्ट थेरेपी की अवधारणा पर हुए कार्य के बाद मुख्य राज्य वन अनुसंधान संस्थान, कानपुर की ओर से भी इस विषय पर 25 अध्ययन किए गए।

इनमें पेड़ों और प्राकृतिक वातावरण के संपर्क को तनाव कम करने में सहायक पाया गया। गांधी बाग या संजय वन में बनेगा वन्यजीव सप्ताह का केंद्र वन विभाग आठ अक्टूबर से वन्यजीव सप्ताह के कार्यक्रम आयोजित करेगा। इस दौरान लोगों को औषधीय और उपयोगी पौधों के बारे में जागरूक करने के लिए ऐसे स्थान का चयन किया जा रहा है, जहां विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे मौजूद हों।

इसके लिए गांधी बाग और संजय वन में से किसी एक का चयन किया जाना है। पेड़ों के बीच क्यों मिलता है सुकून सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ.

वीरोत्तम तोमर के अनुसार, शरीर में डोपामिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन मानसिक स्थिति और भावनाओं को प्रभावित करते हैं। प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने से तनाव कम करने और सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। नीम, पीपल, आंवला, बरगद, अशोक और अर्जुन जैसे पेड़ों से मिलने वाले प्राकृतिक यौगिकों के संपर्क को भी फॉरेस्ट थेरेपी से जोड़कर देखा जाता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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