भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच हुई थी प्रतियोगिता:जब संसाधन सीमित हों, तो पारंपरिक रास्ते पर चलने के बजाय लीक से हटकर सोचें, हार्ड वर्क नहीं, स्मार्ट वर्क चुनें
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →भगवान गणेश और कार्तिकेय स्वामी से जुड़ा प्रसंग है। पौराणिक कथा है कि एक दिन शिव जी और माता पार्वती ने विचार किया कि अब कार्तिकेय-गणेश का विवाह करना चाहिए। शिव जी ने कार्तिकेय और गणेश से कहा कि जो इस पूरे संसार का चक्कर लगाकर पहले लौट आएगा, हम उसका विवाह पहले कराएंगे। कार्तिकेय स्वामी तो अपने वाहन मयूर यानी मोर पर बैठकर उड़ गए।
गणेश जी का वाहन चूहा है, तो उन्होंने बुद्धि से काम लिया। गणेश जी ने तुरंत ही अपने माता-पिता यानी शिव-पार्वती की परिक्रमा कर ली और कहा कि मेरे लिए तो आप दोनों ही पूरा संसार हैं। यह बात सुनकर शिव जी और माता पार्वती बहुत प्रसन्न हो गए। गणेश जी की इस बात से शिव जी इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने गणेश को प्रथम पूज्य होने का वरदान दे दिया।
जब तब कार्तिकेय स्वामी संसार की परिक्रमा करके आए, तब तक उन्हें थोड़ा ज्यादा समय लग गया। वापस लौटकर कार्तिकेय स्वामी ने देखा कि गणेश का विवाह हो गया है। इसके बाद जैसे ही कार्तिकेय को पूरी बात मालूम हुई, तो वे नाराज हो गए। नाराज होकर कार्तिकेय स्वामी कैलाश पर्वत छोड़कर क्रोंच पर्वत पर चले गए।
यह क्रोंच पर्वत आज दक्षिण भारत में कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर है। इसे श्रीपर्वत भी कहते हैं। माता-पिता ने कार्तिकेय स्वामी को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कार्तिकेय का गुस्सा खत्म नहीं हुआ। शिव-पार्वती कार्तिकेय स्वामी को मना नहीं पाए, तो उन्होंने तय किया कि अब से वे हर माह की अमावस्या पर शिव जी और पूर्णिमा पर पार्वती जी कार्तिकेय से मिलने क्रोंच पर्वत पर जाएंगी।
इसलिए श्रीपर्वत के मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में शिव जी और पार्वती जी, इन दोनों की ज्योतियां हैं। मल्लिका यानी पार्वती और अर्जुन यानी शिव जी। प्रसंग की सीख
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
जब संसाधन सीमित हों, तो परंपरा से हटकर नवाचार अपनाना ज़रूरी है। जैसे गणेश ने चूहे से उड़ने का रास्ता चुना, हमें भी स्मार्ट वर्क के माध्यम से समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए। संघर्षों में हिंसा से बचें, संवाद और कानूनी मार्ग अपनाएँ। समाज को प्रेरित करें कि वे रचनात्मक सोच, सहयोग और सहानुभूति के साथ आगे बढ़ें, ताकि सभी के लिए न्याय और समृद्धि संभव हो सके।