भगवान श्री महाकालेश्वर ने चार विभिन्न स्वरूपों में भक्तों को दिए दर्शन

श्री महाकालेश्वर भगवान की चतुर्थ सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर जी का पूजन मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवडा ने किया पूजन शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने सम्पन्न करवाया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के सभामंडप में संभागायुक्त आशीष सिंह, रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर एवं अध्यक्ष श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, ए.डी.एम. एवं प्रशासक प्रथम कौशिक आदि ने भी भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर जी का पूजन-अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए।
सभी गणमान्यो ने पालकी को कंधा देकर नगर भ्रमण हेतु रवाना किया। सभामंडप में पूजन उपरांत अवंतिकानाथ भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर के स्वरूप में पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले।
पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर बैण्ड द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर जी को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई।
राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर की सवारी में लाखो भक्त भगवान शिव का गुणगान करते हुए तथा विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू बजाते हुए चल रहे थे।
सवारी मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर के दर्शन के लिए खडे थे जैसे ही पालकी उनके सामने से निकली वैसे ही भगवान के गुणगान एवं पुष्प वर्षा कर अपने आपको श्रद्धालु धन्य मान रहे थे। सवारी अपने परम्परागत मार्ग से होती हुई रामघाट पहुँची।
जहाँ रामघाट पर मॉं क्षिप्रा के जल से भगवान का पूजन किया गया। पूजन-अभिषेक व आरती उपरांत सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर पहुंची।
जहॉ सिंधिया ट्रस्ट के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर जी का पूजन किया गया। इसके पश्चात सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहा से होती हुई पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप बाबा श्री महाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरुप देने के लिए भगवान श्री महाकालेश्वर की प्रत्येक सवारी में अलग-अलग थीम रखी गई। भगवान श्री महाकालेश्वर जी की चतुर्थ सवारी में ''पर्यावरण संरक्षण'' का संदेश दिया गया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, उज्जैन द्वारा इस चतुर्थ सवारी के माध्यम से संपूर्ण शिव भक्तों को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और माँ शिप्रा की निर्मलता बनाए रखने का अत्यंत महत्वपूर्ण और सामयिक संदेश दिया गया।
इस भव्य सवारी के दौरान मंदिर समिति की ओर से एक विशेष संदेश रथ और झांकी का संचालन किया गया, जिस पर मुख्य रूप से ''प्रकृति की रक्षा, महाकाल की सच्ची भक्ति - आस्था भी, स्वच्छता भी, यही महाकाल की सेवा है'' का दिव्य ध्येय वाक्य अंकित था।
इस अभियान का उद्देश्य यह बताना था कि जिस प्रकार हम देवाधिदेव महादेव की आराधना करते हैं, उसी प्रकार उनकी बनाई इस हरी-भरी प्रकृति और पवित्र नदियों की संभाल करना भी एक सच्ची शिव भक्ति है।
सवारी के दौरान प्रसारित किए गए संदेशों में जनमानस से विशेष आग्रह किया गया कि वे अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक का पूर्ण रूप से त्याग करें ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके।
इसके साथ ही, आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित, स्वच्छ और हरित भविष्य देने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का संकल्प दिलाया गया। मोक्ष दायिनी माँ शिप्रा की पवित्रता को अक्षुण रखने के लिए अपील की गई कि श्रद्धालु नदी में किसी भी प्रकार का कचरा न डालें।
पूजा-सामग्री और निर्माल्य को सीधे नदी में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित निर्माल्य पात्रों में ही समर्पित करने का अनुरोध किया गया। ''जल है तो कल है, नदी है तो जीवन है'' और ''महाकाल के भक्त बनें, प्रकृति के रक्षक बनें'' के इन उद्घोषों के साथ निकली।