भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े स्थलों को ‘श्रीकृष्ण तीर्थ’ के रूप में विकसित करेगी MP सरकार: CM यादव
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भोपाल के रविंद्र भवन में चल रहे सात दिवसीय रासलीला समारोह की पांचवीं संध्या भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्ति के रंग में रंगी रही। कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को संघर्ष, लोककल्याण और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्म से ही कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले श्रीकृष्ण ने चुनौतियों से कभी मुंह नहीं मोड़ा और अपने जीवन का उपयोग लोक कल्याण के लिए किया। उन्होंने कहा कि कान्हा से लेकर विश्व को श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान देने वाले ‘वंदे जगद्गुरु’ श्रीकृष्ण तक का जीवन बेहद संघर्षमय रहा।
डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की और यहीं से उनके जीवन की महत्वपूर्ण यात्रा आगे बढ़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन स्थलों को चिन्हित कर ‘श्रीकृष्ण तीर्थ’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। समारोह में मुख्यमंत्री ने राधा-कृष्ण की सजीव झांकी में राधा-कृष्ण की भूमिका निभा रहे कलाकारों की विशेष आरती उतारी और उनका आशीर्वाद लिया।
उन्होंने दूर-दराज से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। रासलीला समारोह के पांचवें दिन मथुरा से आए निर्देशक माधव आचार्य के निर्देशन में ब्रज के पारंपरिक कलाकारों ने गोवर्धन लीला और रास की भूमिका का मंचन किया।
ब्रज भाषा में हुई प्रस्तुति ने दर्शकों को कृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की लोक परंपरा से जोड़ा। गोवर्धन लीला के माध्यम से प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता के साथ अहंकार पर विनम्रता और भय पर विश्वास की विजय का संदेश दिया गया।
इसके बाद कृष्ण की बांसुरी और गोपियों की अनन्य भक्ति पर आधारित रास की भूमिका प्रस्तुत की गई, जिसे जीवात्मा और परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन तथा पूर्ण समर्पण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम की पांचवीं संध्या में जबलपुर की रूपाली कुसुमकर एवं साथियों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘श्याम तेरी बंसी’ और अन्य भजनों ने वातावरण को कृष्ण भक्ति से सराबोर कर दिया।
गायन में गगनदीप और सोनाली कुसुमकर ने साथ दिया, जबकि वाद्य संगत ने प्रस्तुतियों को और प्रभावशाली बनाया। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह का उद्देश्य प्रदेश की प्राचीन लोककला परंपराओं को मंच देना, युवा पीढ़ी को इनसे जोड़ना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आमजन तक पहुंचाना है।
समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। ---------- श्रीकृष्ण के चरण पड़े स्थलों को ‘श्रीकृष्ण तीर्थ’ के रूप में विकसित करेगी सरकार
CM यादव ने रासलीला समारोह में राधा-कृष्ण की उतारी आरती ब्रज कलाकारों ने गोवर्धन लीला और रास का पारंपरिक मंचन किया गोवर्धन लीला में प्रकृति संरक्षण और अहंकार पर विनम्रता का संदेश रूपाली कुसुमकर एवं साथियों ने भक्ति गीतों से बांधा समां