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भागीरथपुरा दूषित पानी त्रासदी की न्यायिक जांच पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, 66 दिन फाइल लंबित रही तो मेयर की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
भागीरथपुरा दूषित पानी त्रासदी की न्यायिक जांच पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, 66 दिन फाइल लंबित रही तो मेयर की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?

इंदौर। मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी और न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। 2 अक्टूबर को इंदौर स्थित रेसीडेंसी में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर में दूषित पेयजल से बीमारी और मौतों की घटना ने नागरिकों के सुरक्षित पेयजल, प्रशासनिक जवाबदेही और नगर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने पेयजल प्रदूषण के कारणों, बीमारी एवं मौतों, प्रशासनिक और तकनीकी खामियों तथा जिम्मेदारी की जांच की। उनके अनुसार आयोग की रिपोर्ट में पेयजल के दूषित होने, प्रशासनिक देरी और महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि देश के सबसे स्वच्छ शहरों में पहचान रखने वाले इंदौर में दूषित पानी से मौतें कैसे हुईं। सिंघार ने कहा कि इंदौर जैसे बड़े शहरी और आर्थिक केंद्र में पर्याप्त प्रशासनिक संसाधन होने के बावजूद ऐसी घटना होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल को जीवन के अधिकार से जुड़ी मूलभूत आवश्यकता बताया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दूषित पेयजल, बीमारी और मौतों को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पेयजल प्रदूषण, मौतों एवं बीमारियों के कारणों, प्रशासनिक विफलताओं तथा जिम्मेदारी की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। आयोग ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर रिपोर्ट को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

सिंघार ने न्यायिक जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जा रहा पेयजल दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जांच में सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया। उनके अनुसार आयोग ने 36 मौतों का परीक्षण किया, जिनमें से 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया है।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जल एवं सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण में व्यवस्थागत कमियों की ओर भी संकेत किया गया है। सिंघार ने कहा कि इन कमियों के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आयोग के समक्ष कई जरूरी तकनीकी एवं इंजीनियरिंग दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इनमें लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग, पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड शामिल थे। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इतने महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं थे और रिकॉर्ड के संरक्षण एवं उपलब्धता में हुई लापरवाही की जवाबदेही किसकी तय होगी।

सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में देरी पर भी सिंघार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने भागीरथपुरा में सीवेज एवं अपशिष्ट जल पाइपलाइन से जुड़े कार्यों में हुई देरी की जांच की। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया, फाइल मूवमेंट और कार्य निष्पादन सहित विभिन्न चरणों में प्रशासनिक देरी का परीक्षण किया गया है।

मेयर से संबंधित फाइल के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने न्यायिक जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आया कि संबंधित फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। इसके बावजूद आयोग ने मेयर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की।

सिंघार ने कहा कि केवल इस आधार पर मेयर की व्यक्तिगत लापरवाही तय नहीं की गई कि फाइल उनके हस्ताक्षर के लिए लंबित थी, लेकिन सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना की फाइल 66 दिनों तक किस स्तर पर और किसके पास लंबित रही। उन्होंने सरकार और नगर निगम से स्पष्ट करने की मांग की कि इस देरी की प्रशासनिक जिम्मेदारी किसकी थी और इतनी महत्वपूर्ण परियोजना की फाइल इतने लंबे समय तक लंबित क्यों रही।

मुआवजे के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग ने मृतकों के परिवारों तथा प्रभावित मरीजों के लिए मुआवजे एवं सहायता की सिफारिश की है। उनके अनुसार सिफारिशों में मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये तथा प्रभावित मरीजों के लिए आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता का प्रावधान शामिल है।

सिंघार ने सरकार से मांग की कि न्यायिक आयोग की सिफारिशों को कब लागू किया जाएगा, इसकी स्पष्ट समयसीमा बताई जाए। साथ ही प्रभावित परिवारों को वास्तविक भुगतान किस तारीख तक किया जाएगा, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।

उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा के लोगों को पूरे मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय मिलना चाहिए। साथ ही दूषित पेयजल की घटना से जुड़े प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर के सभी सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।