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'भगोड़ा नहीं हूं, मेरा रिफंड कब मिलेगा', विजय माल्या ने सरकार से रखी मांग

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 9 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'भगोड़ा नहीं हूं, मेरा रिफंड कब मिलेगा', विजय माल्या ने सरकार से रखी मांग

ब्रिटेन में रह रहे शराब कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर सुर्खियों का हिस्सा बन गए हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया है और खुद को भगोड़ा कहे जाने पर आपत्ति जताई है.

उन्होंने कहा है कि वो ब्रिटेन के नागरिक हैंऔर वहां की सरकार ने उनके देश छोड़ने पर रोक लगा रखी है.

विजय माल्या पर बैकों से करीब 9900 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाने का आरोप है.

इनमें सबसे बड़ा कर्ज एसबीआई का है. माल्या मार्च 2016 में विदेश भाग गए थे.

भगोड़ा कहने पर जताई आपत्ति

विजय माल्या ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट शेयर किए हैं.

उन्होंने लिखा-जो लोग कहते हैं कि मैं भारत आने से इनकार करने वाला भगोड़ा हूं, उन्हें बता दूं कि मैं 1992 से यूनाइटेड किंगडम का स्थायी निवासी हूं और अभी कानूनी तौर पर मुझे इस देश से बाहर जाने की मनाही है.

यह सब भारत सरकार की 'पोस्टर बॉय' वाली हरकतों से शुरू हुआ, जिन्होंने मेरे मामले में बहुत अन्यायपूर्ण रवैया अपनाया है.

For all who say I am a bhagoda refusing to come to India, please be aware that I have been a permanent resident of the United Kingdom since 1992 and am currently legally prohibited from leaving this country.

All this started with poster boy actions by the Government of India who

Vijay Mallya (@TheVijayMallya) September 8, 2026

ईडी ने मेरी संपत्ति अटैच कर दी

उन्होंने आगे लिखा, लोग मुझ पर शक करते हैं, वे खुद इस बात की पुष्टि कर लें कि ED ने मेरे अटैच किए गए फंड से किंगफिशर के कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए 350 करोड़ रुपये से ज़्यादा जारी किए थे.

मैं भुगतान नहीं कर पाया क्योंकि ED ने मेरी संपत्ति/फंड अटैच कर लिए थे.

For all you naysayers, please ind

📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

विजय माल्या, एक ब्रिटेन निवासी शराब व्यापारी, ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्हें भगोड़ा नहीं कहा जाना चाहिए और रिफंड की माँग की। यह मामला भारत के ऋण विवादों के बीच उभर रहा है, जहाँ माल्या पर लगभग 9900 करोड़ रुपये का बकाया, विशेषकर SBI का, चुकाने का आरोप है। सरकार ने उनके देश छोड़ने पर रोक लगाई है, जिससे उनकी कानूनी स्थिति जटिल हो गई है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के विदेशी ऋण वसूली प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों के अधिकारों के बीच संतुलन पर प्रकाश डालती है। आम जनता पर इसका अस

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