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‘भाई, मर रहा हूं’ मलबे में दबे नीरज का कॉल:दिल्ली बिल्डिंग हादसे में बचे 2 छात्रों की आपबीती, 4 घंटे बाद रेस्क्यू हुआ

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘भाई, मर रहा हूं’ मलबे में दबे नीरज का कॉल:दिल्ली बिल्डिंग हादसे में बचे 2 छात्रों की आपबीती, 4 घंटे बाद रेस्क्यू हुआ

दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को जब हॉस्ट्ल डेज की बिल्डिंग भरभराकर गिरी, उस वक्त अपने रूम में मौजूद छात्रों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ सेकेंड पहले तक छात्र अपने कमरों में थे, वे अचानक कई टन मलबे के नीचे दब गए। इसी मलबे में नितेश छिब और नीरज बावा भी फंसे थे। 19 साल के नितेश की जान लेंटर और मलबे के बीच बने एक छोटे से गैप ने बचाई।

उसका चेहरा खाली जगह में आ गया था, इसलिए वह सांस ले पा रहा था और मदद के लिए आवाज भी लगा पा रहा था। दूसरी तरफ कुछ दूरी पर नीरज भी मलबे में फंसा था। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और कई गंभीर चोटें थीं। बिल्डिंग गिरने के वक्त नितेश और नीरज के साथ क्या हुआ था और मलबे में फंसने के बाद 3 से 4 घंटे कैसे बीते...दोनों की आपबीती उनके चचेरे भाई रोहित छिब से हुई बातचीत पर आधारित है।

रोहित ने दैनिक भास्कर को जैसा बताया, हम उसी आधार पर पूरी घटना बता रहे हैं। नितेश ने नीरज से पूछा- भाई पानी की आवाज आ रही है क्या हॉस्टल गिरने के कुछ मिनट पहले नितेश और नीरज दूसरी मंजिल पर अपने-अपने कमरे में थे। नितेश रविवार को दोपहर 12:30 बजे खाना खाने के बाद अपने कमरे में आया था। तभी दीवारों की तरफ से पानी जैसी आवाज आने लगी।

कुछ देर बाद आवाज तेज होने लगी। नितेश ने पास वाले कमरे में रहने वाले नीरज से पूछा कि क्या उसे भी पानी की आवाज सुनाई दे रही है। नीरज ने भी हां में जवाब दिया। इसके महज 2 सेकेंड बाद ही पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। नितेश के मुताबिक, “मैं मलबे के नीचे फंस गया था। मेरे ऊपर लेंटर जैसा भारी मलबा गिरा था।

मलबे और लेंटर के बीच एक गैप बन गया था। उसमें मेरा चेहरा फंस गया। इस वजह से मैं सांस ले पा रहा था। बोल भी पा रहा था। मेरे पैर मलबे में फंसे थे।” नीरज को आवाज दी तो बोला- ‘मुझे बहुत दर्द हो रहा है’ नितेश ने इसके बाद अपने दोस्त नीरज बावा को आवाज लगाई। नीरज ने जवाब दिया- "मुझे दर्द हो रहा है।" नितेश के मुताबिक, नीरज जिस जगह फंसा था, वहां मलबा ज्यादा था और धूल भी भरी हुई थी।

उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।" नितेश ने बताया, "मैंने मलबे के अंदर से लगातार मदद के लिए आवाज लगानी शुरू कर दी। कुछ देर बाद रेस्क्यू टीम मलबे के ऊपर पहुंची। मैंने टीम के लोगों को आपस में बात करते सुना। वे कह रहे थे कि दूसरी बिल्डिंग भी गिरने वाली है। मेरे लिए यह सुनना और

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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