भारत ने ऐसा कौन सा प्रपोजल दिया? खुशी से फूले नहीं समाए जेलेंस्की, जानें
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राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि मिस्र, भारत और तुर्की ने काला सागर (Black Sea) में लगी नाकेबंदी को खत्म करने के लिए अपने-अपने सुझाव दिए हैं.
यूक्रेनफॉर्म के एक रिपोर्टर के अनुसार, राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क में हो रहे 'इंटरनेशनल क्रीमिया प्लेटफार्म' के छठे शिखर सम्मेलन में अपने भाषण के दौरान यह बात कही.
जेलेंस्की ने कहा, "कई देशों ने काला सागर में खाद्य सुरक्षा और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिशों में पहले ही साथ दिया है.
मिस्र, भारत और तुर्की ने हमारे सामने कुछ विकल्प रखे हैं और वे लिखित रूप में मौजूद हैं.
हम उस रास्ते से सहमत हैं जो सुरक्षा ला सकता है और अब हम रूस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं." उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर रूस भी तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए, तो यूक्रेन काला सागर में सुरक्षित आवाजाही और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने को तैयार है.
रूस को दूसरों का सम्मान करने की जरुरत यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, "हमें कहीं न कहीं से तो शुरुआत करनी ही होगी और रूस को दूसरों का सम्मान करने से शुरुआत करनी चाहिए और दुनिया के प्रति बुनियादी सम्मान छोटी-छोटी चीजों से शुरू होता है.
खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और लोगों का बिना किसी डर के जीने का अधिकार.'' उनके अनुसार, क्रीमिया पुतिन के युद्ध का केंद्र बना हुआ है और काला सागर में लड़ाई से पैदा हुए सभी संकटों की वजह भी यही है.
आसानी से आ जा रहे होते यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, "अगर रूस ने क्रीमिया पर कब्जा न किया होता, अगर पुतिन ने क्रीमिया को युद्ध का अड्डा और एक विशाल सैन्य ठिकाना न बनाया होता, तो अनाज और खाद, डीजल और तेल आज भी काला सागर से आसानी से आ-जा रहे होते.
ठीक वैसे ही जैसे हमारे खिलाफ पुतिन के युद्ध से पहले होता था.
लेकिन उन्होंने हर संभव नियम तोड़ने का रास्ता चुना और अब इसके अलावा, हम ईरान के साथ युद्ध और मध्य पूर्व व खाड़ी क्षेत्र में अन्य संकट भी देख रहे हैं. ये सब उसी चीज को और बढ़ाते हैं जिसकी शुरुआत बहुत पहले हुई थी.
पुतिन के इस विश्वास से कि वे युद्ध शुरू कर सकते हैं और बिना किसी सजा के बच निकल सकते हैं.
भारत बातचीत के लिए जोर दे रहा है भारत की भूमिका का जिक्र नई दिल्ली की कोशिशों के बीच आया है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारत यूक्रेन और रूस दोनों से ही बातचीत कर रहा है और सुझाव दे रहा है जिससे ये युद्ध जल्द खत्म हो सके.
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📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
काला सागर की नाकेबंदी जैसी जटिल समस्याएँ हमें दिखाती हैं कि संघर्षों का समाधान संवाद और सहयोग से ही संभव है। जब कोई विवाद बढ़े, तो पहले शांतिपूर्ण वार्ता का मार्ग अपनाएँ, फिर कानूनी या अंतरराष्ट्रीय मंचों में समाधान खोजें। हर व्यक्ति को अपने कार्यों की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, ताकि हिंसा या आक्रामकता के बजाय सहानुभूति और समझदारी से समाज आगे बढ़े।