भारत-अमेरिका के Yudh Abhyas में पहली बार Counter-Drone System का ट्रायल, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी मारक क्षमता
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भारतीय सेना और अमेरिकी सेना अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करते हुए 'एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण शुरू करेंगी। जारी जानकारी के अनुसार, इस साल की ट्रेनिंग में अलास्का के फोर्ट वेनराइट में तैनात अमेरिकी सेना के 11वें एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-ट्रेन्ड सैनिकों को भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा।
इस एक्सरसाइज में 3rd मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स (3MDTF) की भागीदारी से इसे और मजबूती मिलेगी, जो इस द्विपक्षीय ढांचे में एडवांस्ड लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को शामिल करेगी। यह संयुक्त एक्सरसाइज 28 सितंबर को समाप्त होगी। बताया गया है कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी सेना प्रशांत के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल "जेबी" वोवेल प्रमुख ट्रेनिंग कार्यक्रमों में शामिल होंगे, जो भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।
इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा युद्ध अभ्यास दिखाता है कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी कितनी मजबूत हो गई है। हमारे सैनिक साथ मिलकर ट्रेनिंग कर रहे हैं, एक-दूसरे से सीख रहे हैं और ऐसा भरोसा और क्षमताएं बना रहे हैं जो हमारे दोनों देशों को और मजबूत और सुरक्षित बनाती हैं।" जहां राजदूत ने रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया, वहीं वोवेल ने उस ऑपरेशनल पहुंच और व्यावहारिक तैयारी पर जोर दिया जो यह सालाना द्विपक्षीय अभ्यास संयुक्त सेना को देता है।
वोवेल ने कहा, "युद्ध अभ्यास का मकसद भरोसा बनाना, जानकारी साझा करना और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दिखाना है। हर साल भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी मजबूत होती जा रही है और हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान में BLA का भीषण तांडव, 28 ऑपरेशनों में 52 Pakistani Soldiers के मारे जाने का दावा इस रिलीज़ में बताया गया है कि इस साल की एक्सरसाइज़ में 'कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़' और 'फ़ील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़' शामिल हैं, जो आखिर में एक जॉइंट 'लाइव-फ़ायर डेमोंस्ट्रेशन' के साथ खत्म होंगी।
इस इवेंट में अमेरिका और भारत के कई लंबी दूरी और सटीक निशाना लगाने वाले फ़ायर और रॉकेट सिस्टम के डिजिटल इंटीग्रेशन को दिखाया जाएगा। 'ऑपरेशन पाथवेज़' के रणनीतिक फ़्रेमवर्क के तहत काम करते हुए, यह एक्सरसाइज़ एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि इसमें भारत में पहली बार एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io